5 मई 2026

नई दिल्ली:
होर्मुज की खाड़ी में हालात एक बार फिर बेकाबू होते नजर आ रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ के एलान के बाद खाड़ी देशों में युद्ध की आहट सुनाई देने लगी है। यह विवाद तब बढ़ा जब अमेरिका ने अपने व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए नौसैनिक अभियान शुरू किया और ईरान ने इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन करार दिया।
क्या है विवाद की मुख्य वजह?
पिछले दो महीनों से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में कई मालवाहक जहाज फंसे हुए हैं। अमेरिका का कहना है कि इन जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ जरूरी है। इसके जवाब में ईरान ने कड़ा रुख अपनाते हुए अमेरिकी युद्धपोतों पर मिसाइलों और ड्रोन से हमला करने का दावा किया है।
ईरान की ओर से यह बयान आया है कि उन्होंने जास्क बंदरगाह के पास घुसपैठ की कोशिश कर रहे दो अमेरिकी जहाजों को निशाना बनाया है। वहीं, अमेरिका के सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने ईरान के इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि उनका अभियान केवल जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने के लिए है।
बड़े नुकसान की खबरें
इस टकराव में भारी नुकसान की भी खबरें मिल रही हैं:
जहाजों पर हमला: ईरान ने दावा किया है कि उसने अमेरिका की सात सैन्य नौकाओं को डुबो दिया है।
तेल ठिकाने पर आग:संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के फुजैरा में एक तेल ठिकाने पर हमले के बाद आग लग गई। बताया जा रहा है कि इस हादसे में तीन भारतीय नागरिक भी घायल हुए हैं।
जवाब में कार्रवाई: अमेरिका ने भी ईरान के कई ड्रोन और मिसाइल हमले नाकाम करने का दावा किया है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और चेतावनी
ईरान की एकीकृत कमान के प्रमुख अली अब्दुल्लाही ने साफ चेतावनी दी है कि किसी भी विदेशी सैन्य बल को ईरान की सीमा में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ को अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन बताया है।
दूसरी ओर, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी है कि तनाव के बीच अमेरिका ने ईरान के एक तेल टैंकर के 22 चालक दल के सदस्यों को रिहा कर दिया है, जिसे एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।
व्यापार पर असर
होर्मुज की खाड़ी दुनिया के कुल तेल व्यापार का एक बहुत बड़ा हिस्सा संभालती है। यहाँ बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आने की आशंका है, जिसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। फिलहाल दोनों देश अपनी-अपनी जिद पर अड़े हुए हैं, जिससे स्थिति गंभीर बनी हुई है।