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8 जुलाई 2026 :
बांग्लादेश/ ढाका:

मजहब की बुनियाद पर बने पाकिस्तान और बांग्लादेश में कट्टरपंथियों का कहर देखते बन रहा है। इस वक्त बांग्लादेश से खबर आ रही है जिसमें ढाका के अंदर पूरे बांग्लादेश की राजनीति को हिला कर रख दिया है। बांग्लादेश में फिर से हिंसा और अस्थिरता की आशंकाएं बढ़ गई है।

दरअसल भारत विरोधी बयानों की वजह से और कट्टरपंत की राजनीति चलाने वाले नाहिद इस्लाम की पार्टी की एक रैली मेशबम धमाका का निशाना बन गई।
बांग्लादेश की राजधानी ढाका के पास सावर में नेशनल सिटीजन पार्टी यानी एनसीपी की एक मार्च रैली निकाल रही थी । यहां कई लोग इकट्ठा थे रात करीब 9:45 पर सावर थाना स्टैंड ईदगाह मैदान के पास अचानक एक बम धमाका होता है ,इस धमाके में चार लोग घायल हुए हैं और कुछ लोगों की मौत भी हुई है।

छात्र आंदोलन की दूसरी वर्षगांठ पर रैली थी आयोजित:
दरअसल यह रैली उस छात्र आंदोलन की दूसरी वर्षगांठ पर आयोजित की गई थी, जिस रैली को जुलाई 2024 में शेख हसीना सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया गया था।  सीपी पूरे बांग्लादेश में यह अभियान चला रही है और जनमत संग्रह, जुलाई चार्ट, रोजगार, महंगाई ,बिजली संकट, सीमा सुरक्षा जैसे मुद्दों को पार्टी उठा रही है। इस पार्टी के प्रमुख नाहिद इस्लाम इस धमाके के बाद  सीधे पुलिस प्रशासन पर बरस पड़ा।  उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं पता कि यह हमला किसने किया है और सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि जनता की सुरक्षा में सरकार नाकाम है।  सरकार सुरक्षा नहीं दे सकती ।
पुलिस इस पूरे बम धमाके की जांच कर रही है । अभी तक किसी संगठन ने इस धमाके की जिम्मेदारी नहीं ली है।  एनसीपी का कहना है कि यह हमला उनके राजनीतिक अभियान को रोकने की एक साजिश है ,किंतु अभी तक कोई भी पुष्टि इस धमाके के बारे में नहीं की गई है।
इस धमाके ने फिर से यह सवाल खड़ा कर दिया कि बांग्लादेश एक बार फिर राजनीतिक हिंसा और अस्थिरता के दौर में लौट रहा है । जब सियासत सड़कों पर बारूद के सहारे तय होने लगे ,तब सबसे बड़ा नुकसान लोकतंत्र और आम जनता का ही होता है । यह एनसीपी नेता की रैली थी ,जिसने शेख हसीना के खिलाफ बहुत बड़ा आंदोलन छेड़ा था।  इसी वजह से शेख हसीना को पलायन करना पड़ा था।  अब जब शेख हसीना वापस बांग्लादेश लौटने की बात कर रही है तो यहां बांग्लादेश में ढाका में रैली पर धमाका हो जाता है।

पाकिस्तान में कई वर्षों तक कट्टरपंथ और वामपंथी को बढ़ावा दिया गया।  आज यह आतंकी  संगठन सबसे बड़े सरदर्द बन चुके हैं।  बांग्लादेश में भी ऐसे ही हालात दिखाई दे रहे हैं।
यूनुस सरकार के दौर में जिस तरह हिंदू समुदाय पर हमलों और कट्टरपंथी घटनाओं को लेकर सवाल उठे थे, आज फिर उसी तरह का माहौल बांग्लादेश में देखने को मिल रहा है।
यानी बांग्लादेश एक बार फिर राजनीतिक हिंसा अस्थिरता के दौर में लौट रहा है।


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