29 जुलाई 2026:
मध्य प्रदेश /भोपाल/

भोपाल में इस समय मूंग खरीदी को लेकर किसान सड़कों पर हैं। भोपाल शहर किसानों के उग्र आंदोलन का केंद्र बन चुका है। मूंग खरीदी, ई-टोकन सिस्टम की गड़बड़ी और फसलों के सही दाम की मांग को लेकर किसान भोपाल की सड़कों पर डटा हुआ है।
आज आंदोलन का दूसरा दिन है और किसान सीधे मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने पर अड़े हुए हैं ।लेकिन इस आंदोलन की सबसे अनोखी बात यह है कि अब इसमें जेनजी़ यानी आज की युवा पीढ़ी भी शामिल हो गई है।

भोपाल शहर की हुई किलेबंदी: ट्रैफिक व्यवस्था हुई डाइवर्ट:
आंदोलन का आज दूसरा दिन है और हालात अब ज्यादा तनावपूर्ण हो गए हैं क्योंकि किसान अब आर पार की लड़ाई के मूड में है।
इस आंदोलन की वजह से सड़क में ट्रैफिक ठप्प हो चुका है। स्कूलों की छुट्टी कर दी गई है और पुलिस ने शहर की किलेबंदी कर दी है। किसानों के सीएम हाउस के घेराव के ऐलान को देखते हुए भोपाल पुलिस पूरी तरह से मुस्तैद है और बैरिकेडिंग लगाकर  वीर सावरकर सेतु से पहले छावनी जैसा माहौल बना दिया गया है । नर्मदापुरम रोड ,एम्स ,बंसल प्लाजा और कटारा हिल्स जैसे इलाकों में कई किलोमीटर तक का जाम लगने की संभावना है।

ट्रैफिक डायवर्जन की वजह से आम जनता हो रही बेहाल:
किसानों के सीएम हाउस के घेराव को देखते हुए कई जगह बैरिकेडिंग लगाकर ट्रैफिक डायवर्ट किया गया है और इस डायवर्जेंट की वजह से ही कल रात से ही आम जनता बेहाल है।
खान की कविता को देखते हुए कलेक्टर ने नर्मदा पुरम रोड के सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूलों की छुट्टी का ऐलान कर दिया है।

किसानों को मिला जेनज़ी का साथ:
आंदोलन के दूसरे दिन हालत बहुत ज्यादा तनावपूर्ण हो गए हैं।  किसान अब आर पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रहे हैं।
किंतु इस आंदोलन की सबसे नई और बुलंद आवाज बन रही है जेनज़ी:
आज का युवा किसानों के समर्थन में हाथ में तख्तिया लेकर सड़कों पर उतर आया है । यानी आज का युवा किसानों के साथ खड़ा है। एक तरफ किसान अपने मूंग खरीदी और टोकन की मांगों पर अड़े हुए हैं तो दूसरी तरफ इस आंदोलन को जेन जी़ का साथ मिलने से इसकी धार और तेज हो गई है।  आम जनता जाम से परेशान है, स्कूल बंद है और सब की निगाहें इस बात पर टिकी है कि क्या सरकार किसानों के बीच बातचीत का कोई रास्ता निकल पाएगी या गतिरोध लंबा चलेगा।
मोहन यादव की किसानों से अपील:
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने साफ कहा है कि सरकार किसानों के प्रतिनिधि मंडल से बात कर रही है और जल्द ही कोई समाधान निकल आएगा । लेकिन किसानों का रुख साफ है, जब तक सिस्टम नहीं सुधरेगा ,मूंग का वाजिब दाम नहीं मिलेगा, तब तक यह आंदोलन नहीं थमेगा ।  अब देखना होगा कि प्रशासन  इस बढ़ते दबाव के बीच क्या कदम उठाता है।

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