भोपाल
मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता को लेकर हलचल तेज हो गई है l आगामी 20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र में यह विधेयक पेश किया जा सकता है l कानून को लेकर गठित की गई समिति के समक्ष जन परामर्श के दौरान बड़ी संख्या में सुझाव मिले हैं l इन सुझावों में सबसे प्रमुख मुद्दा आदिवासियों और धर्म परिवर्तन करने वाले लोगों से जुड़ा हुआ है l मतांतरित आदिवासियों को रियायत नहीं देने के सुझाव देने वालों का बड़ा कड़ा रुख है, कि जो आदिवासी अपना मूल धर्म छोड़कर किसी अन्य धर्म जैसे ईसाई अथवा इस्लाम को अपना चुके हैं, उन्हें UCC के तहत मिलने वाली किसी भी प्रकार की रियायत या विशेष दर्जे का लाभ नहीं मिलना चाहिए l
अधिकारों और सुविधाओं से वंचित करने का पक्ष- एक पक्ष का तर्क है कि यदि कोई आदिवासी मतांतरित हो जाता है तो उसे आदिवासियों को मिलने वाले अधिकार और सरकारी सुविधाओं के दायरे से बाहर कर दिया जाना चाहिए l हालांकि समिति सैद्धांतिक रूप से इस पर सहमत है, लेकिन इसके कानूनी पहलुओं की बारीकी से जांच की जा रही हैl
मूल आदिवासियों को बाहर रखने की वकालत –
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली समिति और पूर्व न्यायाधीश मोहन पी तिवारी के तर्कों के अनुसार आदिवासियों की अपनी अनूठी परंपराएं और सामाजिक व्यवस्थाएं हैं ,इसलिए मूल आदिवासियों को इस कानून के दायरे से बाहर रखा जाना चाहिए l
कानूनी अड़चने और सुप्रीम कोर्ट के फैसले –
समिति के सूत्रों के अनुसार इन विषयों पर काफी गहन विचार विमर्श हुआ है l इसके कानूनी पहलुओं में कुछ मुख्य बातें सामने आई है l वर्तमान संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार एसटी वर्ग के लोगों के लिए धर्म परिवर्तन के बाद उनके अधिकारों पर कोई सीधी रोक-टोक नहीं है l सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों में भी यह स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई व्यक्ति किसी अन्य धर्म को अपना लेता है तब भी वह कानूनी रूप से अपना ST का दर्जा और उसे जुड़े अधिकतर अधिकार जारी रख सकता है l उनके जाति प्रमाण पत्र मान्य रहते हैं और उन्हें आरक्षण का लाभ मिलता रहता है l
सामाजिक संगठनों का तर्क –
वनवासी कल्याण आश्रम के पदाधिकारियों और अन्य सामाजिक विचारको का कहना है कि मत्तांतरण के बाद भी कई लोग आदिवासी बने हुए हैं l उनका यह भी तर्क है कि कोई आदिवासी समाज की लड़की किसी दूसरी जाति में विवाह करती है तो उस पर भी UCC के नियम इसी तरह लागू होने चाहिए l
गोवा और उत्तराखंड का उदाहरण –
बैठक में सुझावों के दौरान यह बात भी सामने आई कि गोवा और उत्तराखंड में ucc को पूरी तरह लागू किया गया है l गोवा में पुर्तगाली शासन के समय से ही पुर्तगाली नागरिक संहिता लागू है ,जो शादी, विवाह विच्छेद और विरासत जैसे पारिवारिक मामलों में सभी धर्म के नागरिकों पर समान रूप से लागू होती है l जन परामर्श के दौरान आए इन सभी सुझावों और कानूनी प्रावधानों का गहन अध्ययन करने के बाद समिति जल्द ही अपनी अंतिम अनुशंसाएं सरकार को सौंपेगी l


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