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21 मई 2026

नई दिल्ली:

भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने जारी किए E-22 से लेकर E-30 ईंधन के नए मानक, विदेशों पर भारत की निर्भरता होगी कम।
नई दिल्ली से वाहन मालिकों और आम जनता के लिए एक बड़ी और राहत देने वाली खबर आई है। देश में पेट्रोल की बढ़ती कीमतों और बाहरी देशों से महंगे कच्चे तेल के आयात को कम करने के लिए सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। अब देश में पेट्रोल के अंदर 30 प्रतिशत तक एथेनॉल मिलाने (एथेनॉल ब्लेंडिंग) का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
भारत सरकार ने पूरे देश में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E-20) बेचने का लक्ष्य समय से काफी पहले ही हासिल कर लिया था। इस बड़ी सफलता के बाद अब सरकार तेजी से 30 प्रतिशत एथेनॉल मिक्स ईंधन की तरफ कदम बढ़ा रही है।

तय किए गए नए मानक (Standards)
सरकारी एजेंसी भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने पेट्रोल में ऊंचे स्तर की एथेनॉल ब्लेंडिंग के लिए नए गाइडलाइंस और मानक जारी कर दिए हैं। इसके तहत अब बाज़ार में E-22, E-25, E-27 और E-30 नाम से नए ईंधन विकल्प देखने को मिलेंगे। इसका मतलब यह है कि इन ईंधनों में क्रमशः 22 प्रतिशत से लेकर 30 प्रतिशत तक एथेनॉल की मात्रा मिलाई जाएगी।

पेट्रोल पंपों पर साफ-साफ दिखेगा लेबल
बीआईएस ने इस नए मिक्स ईंधन की शुद्धता की जांच, सैंपलिंग और टेस्टिंग के कड़े तरीके तय किए हैं। ग्राहकों को किसी भी तरह का भ्रम न हो, इसलिए अब देश के सभी पेट्रोल पंपों पर इन ईंधनों को स्पष्ट रूप से लेबल किया जाएगा। पंप पर साफ अक्षरों में लिखा होगा कि कौन सा पेट्रोल E-22 है और कौन सा E-25 या E-30, ताकि वाहन चालक अपनी गाड़ी के हिसाब से सही ईंधन चुन सकें। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह कदम भारत को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में गेमचेंजर साबित होगा।

E-20 से देश को बची भारी-भरकम रकम
एथेनॉल ब्लेंडिंग से देश को कितना बड़ा आर्थिक फायदा हो रहा है, इसके आंकड़े बेहद हैरान करने वाले हैं:
* साल 2014 से लेकर अब तक E-20 ईंधन की बिक्री की वजह से भारत को लगभग 1.44 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा (फॉरेन एक्सचेंज) की बचत हुई है।
* इस नीति के चलते करीब 245 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल का आयात कम करना पड़ा है। यही वजह है कि सरकार अब इसे और बड़े स्तर पर बढ़ावा दे रही है।
ग्लोबल संकट और महंगाई से बचने का अचूक फॉर्मूला
भारत इस समय दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चे तेल का आयातक देश है। पिछले वित्त वर्ष में देश का कच्चे तेल का आयात बिल ही करीब 123 अरब डॉलर के आसपास रहा था। वर्तमान में पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध और वैश्विक ऊर्जा संकट की वजह से कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊपर-नीचे हो रही हैं, जिससे भारतीय रुपये में गिरावट और देश में महंगाई बढ़ने का खतरा हमेशा बना रहता है। ऐसे में देश के भीतर तैयार होने वाला एथेनॉल इस समस्या का एक बेहद मजबूत और सस्ता समाधान है।

ब्राजील से सीखकर आम जनता के लिए सस्ता होना चाहिए ईंधन
टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के वाइस प्रेसिडेंट और देश के जाने-माने ऑटो एक्सपर्ट विक्रम गुलाटी ने सरकार के इस कदम का दिल से स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि जिस रफ्तार से भारत ने 20 प्रतिशत ब्लेंडिंग का टारगेट हासिल किया, उससे उम्मीदें बहुत बढ़ गई हैं।
उन्होंने सरकार को एक अहम सलाह देते हुए कहा कि हमें ब्राजील देश के मॉडल से सीख लेनी चाहिए। ब्राजील की तरह ही भारत में भी एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को सामान्य पेट्रोल के मुकाबले काफी सस्ता बेचा जाना चाहिए। जब यह ईंधन 30 प्रतिशत तक सस्ता होगा, तो आम लोग और वाहन चालक इसे खुशी-खुशी अपनाएंगे। इससे न केवल पर्यावरण की रक्षा होगी और किसानों की आमदनी बढ़ेगी, बल्कि देश की बहुत बड़ी रकम विदेशों में जाने से भी बच जाएगी।


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