15 अप्रैल 2026
नई दिल्ली:
केंद्र सरकार ने देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में एक बड़े फेरबदल की तैयारी कर ली है। संसद और विधानसभाओं में महिला आरक्षण लागू करने के लिए संविधान में 131वां संशोधन विधेयक लाने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही लोकसभा सीटों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़ाकर 850 करने की योजना है।
इस बड़े बदलाव के पीछे मुख्य आधार 2011 की जनगणना को बनाया जा रहा है, जिसके अनुसार सीटों का नया परिसीमन (सीमा तय करना) किया जाएगा।
सीटों का नया गणित: राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का हिस्सा
प्रस्तावित योजना के अनुसार, 850 सीटों का बंटवारा कुछ इस तरह हो सकता है:
815 सीटें: सीधे राज्यों से चुनकर आने वाले सांसदों के लिए होंगी।
35 सीटें: केंद्र शासित प्रदेशों के लिए सुरक्षित रखी जाएंगी।
सरकार ने 16 से 18 अप्रैल तक संसद का एक विशेष सत्र बुलाया है, जिसमें इन विधेयकों पर विस्तार से चर्चा होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह इस सत्र में सरकार का पक्ष रखेंगे।
महिला आरक्षण पर क्या है अपडेट?
नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। पहले इसे 2034 से लागू करने की बात कही जा रही थी, लेकिन अब सरकार इसे 2029 के लोकसभा चुनावों से ही लागू करने की मंशा रखती है। 16-17 अप्रैल को लोकसभा और 18 अप्रैल को राज्यसभा में इस पर अहम चर्चा होने की उम्मीद है।
विपक्ष की चिंता और विवाद की वजह
सरकार के इस कदम पर विपक्ष ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। मुख्य विवाद 2011 की जनगणना को परिसीमन का आधार बनाने को लेकर है:
दक्षिण भारत का नुकसान: विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस का कहना है कि जनसंख्या को आधार बनाने से दक्षिण भारतीय राज्यों की सीटें कम हो सकती हैं।
सजा जैसा कदम: उन राज्यों का तर्क है कि जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण के लिए अच्छा काम किया, सीटें कम होने से उन्हें एक तरह से राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
विपक्ष महिला आरक्षण का समर्थन तो कर रहा है, लेकिन जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया को लेकर सरकार के साथ टकराव की स्थिति बनी हुई है।
क्यों जरूरी है यह बदलाव?
बढ़ती आबादी के साथ सांसदों पर काम का बोझ बढ़ा है। कई लोकसभा क्षेत्र इतने बड़े हो गए हैं कि वहां विकास कार्यों की निगरानी करना मुश्किल होता है। सीटों की संख्या बढ़ने से जनता का प्रतिनिधित्व बेहतर हो सकेगा और महिला आरक्षण से राजनीति में महिलाओं की भागीदारी भी सुनिश्चित होगी।
अब देखना यह होगा कि 16 अप्रैल से शुरू हो रहे विशेष सत्र में सरकार विपक्ष की शंकाओं का समाधान कैसे करती है।


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