2 अगस्त 2026:
धर्म और ज्ञान:
30 जुलाई से सावन का महीना प्रारंभ हो चुका है और कल 3 अगस्त को सावन का प्रथम सोमवार पड़ रहा है। आप तो जानते ही हैं कि सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित होता है। मान्यता है कि सावन के सोमवार में शिव की पूजा करने का विशेष महत्व होता है। इस दिन शिवलिंग का दूध दही शहद से जलाभिषेक कर बेलपत्र भांग धतूरा अर्पित कर भोलेनाथ को प्रसन्न ने किया जाता है। इस दिन श्रद्धा भाव से व्रत और पूजन करने से शिव की कृपा प्राप्त होती है ।
आईए जानते हैं सावन के प्रथम सोमवार का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि:
शुभ मुहूर्त:
ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:19 से 5:01 तक ।
अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:00 बजे से 12:54 तक ।
प्रदोष काल शाम 6:26 से 7:56 तक ।
निशिता काल का मुहूर्त रात्रि 11:33 से 12:21 तक।
शिव की पूजा विधि:
सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर शिव के मंदिर जाना शुभ होता है।
सावन के प्रथम सोमवार पर
किसी भी शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग पर शुद्ध जल और गंगाजल अर्पित करना चाहिए। दूध ,दही ,घी, शहद से अभिषेक करें।
इसके बाद शुद्ध जल से पुनः स्नान कराएं।
बेलपत्र शमी के पत्र ,धतूरा अर्पित करें।
किंतु ध्यान रखें कि बेलपत्र साफ़ सुथरी हो और खंडित ना हो।

कैसे करें शिव का जलाभिषेक:
सबसे पहले पूजा स्थल को साफ करें और शिवलिंग को भी साफ करें।
शिवलिंग पर शुद्ध जल और गंगाजल चढ़ाएं।
और पंचामृत से शिवलिंग का अभिषेक करें।
पंचामृत अर्पित करने के बाद  शुद्ध जल से शिवलिंग को स्नान करायें।
अब शिवलिंग पर 5 ,11 या 21 बेलपत्र चढ़ायें। भांग ,धतूरा, फल ,फूल शमी के पत्र अर्पित करें । चंदन, अक्षत और तिल भी अर्पित करें।
इसके साथ ही पार्वती जी को सुहाग की सामग्री अर्पित करें । भगवान गणेश को  दूर्वा अर्पित करें और पूरे शिव परिवार का पूजन करें।
इसके साथ ही नंदी महाराज का भी पूजन करें।
घी  का दीपक जलाएं और आरती करें।
ओम नमः शिवाय का मंत्र जाप करें।
रुद्राक्ष की माला से ‘ॐ नमः शिवाय’  की एक माला अवश्य करें।
यदि संभव हो तो पांच या 11 माला का जाप करें।

याद रखें शिव की आधी परिक्रमा की जाती है।

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