*अजमेर शरीफ में शिव मंदिर होने का दावा, महाराणा प्रताप सेना संगठन ने न्यायालय में दाखिल की याचिका*
संवाददाता
20 January 2026
अपडेटेड: 4:59 PM 0thGMT+0530
अजमेर दरगाह शरीफ में शिव मंदिर होने का दावा:
अजमेर शरीफ दरगाह को लेकर एक बार फिर धार्मिक और ऐतिहासिक बहस तेज हो गई है। महाराणा प्रताप सेना संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राज्यवर्धन सिंह परमार द्वारा न्यायालय में एक याचिका दाखिल की गई है, जिसमें दावा किया गया है कि वर्तमान में जिसे अजमेर शरीफ दरगाह के रूप में जाना जाता है, वह मूल रूप से एक प्राचीन शिव मंदिर था। याचिका में कहा गया है कि मुगल आक्रांताओं द्वारा इस स्थल पर कब्जा कर उसे दरगाह का स्वरूप दिया गया।
दरगाह में शिव मंदिर होने का दावा:
याचिका में राष्ट्रपति भवन में प्रस्तुत की गई शिकायत और दस्तावेजों का भी उल्लेख किया गया है। इसमें राजस्थान सरकार के राजस्व विभाग से संबंधित पुराने रिकॉर्ड, नक्शे और तस्वीरें संलग्न की गई हैं, जिनमें अजमेर जिले का प्राचीन नाम “अजय मेरु” बताया गया है। याचिकाकर्ता का दावा है कि इन दस्तावेजों से यह स्पष्ट होता है कि यहां पहले नियमित पूजा-अर्चना होती थी और यह स्थल दरगाह या दरबार नहीं, बल्कि एक धार्मिक मंदिर था।
याचिकाकर्ता का कहना है कि अजमेर शरीफ परिसर के आसपास और ढाई दिन का झोपड़ा जैसे ऐतिहासिक स्थलों पर भी ऐसे प्रतीक और चिन्ह मौजूद हैं, जिन्हें हिंदू धार्मिक परंपरा से जोड़ा जाता है। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि कुछ संरचनाओं पर स्वास्तिक जैसे धार्मिक चिन्ह पाए गए हैं, जिन्हें आस्था और सांस्कृतिक पहचान का प्रमाण बताया जा रहा है। याचिकाकर्ता का दावा है कि यह केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि ऐतिहासिक तथ्यों और पुरातात्विक साक्ष्यों से जुड़ा मामला है।
पेश किया संबंधित प्रमाण:
याचिका में यह भी कहा गया है कि अजमेर शरीफ से जुड़ी वर्तमान मान्यताओं के समर्थन में कोई ठोस आधार या प्रामाणिक ऐतिहासिक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए हैं, जबकि हिंदू पक्ष के पास नक्शे, फोटो और राजस्व रिकॉर्ड के रूप में साक्ष्य मौजूद हैं। इसी आधार पर न्यायालय से मामले की निष्पक्ष जांच और ऐतिहासिक तथ्यों के परीक्षण की मांग की गई है।
इस याचिका के सामने आने के बाद अजमेर सहित राजस्थान के राजनीतिक और धार्मिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। प्रशासनिक स्तर पर फिलहाल कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन मामला संवेदनशील होने के कारण सभी पक्षों की निगाहें न्यायालय के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।
कोर्ट ने की याचिका स्वीकार:
इस याचिका को कोर्ट ने सुनवाई योग्य मानते हुए स्वीकार कर लिया है। फिलहाल यह प्रारंभिक चरण में है और आगे दस्तावेज़ों, ऐतिहासिक रिकॉर्ड व पक्षों की दलीलों के आधार पर सुनवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
कोर्ट द्वारा याचिका स्वीकार किए जाने के बाद यह मामला अब न्यायिक परीक्षण के दायरे में आ गया है, जिस पर आने वाले समय में अगली तारीखों पर सुनवाई होगी।