उज्जैन में संतों के लिए जमीन देगी सरकार, अखाड़ों को मिलेगी सुविधाएं:
संवाददाता
20 March 2026
अपडेटेड: 4:22 PM 0thGMT+0530
20 मार्च 2026
भोपाल। उज्जैन में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है और अब 5 करोड़ से अधिक यात्री दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने संत समाज और अखाड़ों के लिए विशेष व्यवस्थाएं करने का निर्णय लिया है।
सरकार 13 अखाड़ों के महामंडलेश्वर, संत-महंत और उनके प्रतिनिधियों के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध कराएगी, ताकि उन्हें बेहतर सुविधाएं मिल सकें। सिंहस्थ के दृष्टिगत यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बाबा महाकाल मंदिर के पास स्थित सम्राट विक्रमादित्य होटल को नए स्वरूप में विकसित किया गया है। इसके साथ ही वीर भारत न्यास के माध्यम से पुरानी कोठी का भी जीर्णोद्धार किया गया है।
उज्जैन के पास प्राचीन जूना महाकाल स्थल भी मौजूद हैl उज्जैन दुनिया के लिए ग्रहों की काल गणना का केंद्र माना जाता है। इसी आधार पर राज्य सरकार ने वैदिक घड़ी का निर्माण भी कराया है।
अनोखी खूबियों से भरी है वैदिक घड़ी:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 फरवरी 2024 को विश्व की पहली वैदिक घड़ी का उद्घाटन किया था। यह उज्जैन आने जाने वाले लोगों के लिए एक प्रमुख आकर्षण का केंद्र है। यह वैदिक घड़ी भारतीय पंचांग के आधार पर समय को बताती है।
यह घड़ी उज्जैन में जंतर मंतर के अंदर सरकारी जीवाजी वेधशाला के पास 85 टावर पर लगी हुई है । यह घड़ी पूर्ण रूप से डिजिटल घड़ी है । जिसमें एक घंटा 48 मिनट का होता है और एक दिन में 24 घंटे के बजाय 30 घंटे होते हैं। दरअसल उज्जैन प्राचीन काल से ही गणना का केंद्र रखा है । यह नगरी कर्क रेखा पर स्थित है । इसी वजह से प्राचीन काल में यहां कर्कराज मंदिर का निर्माण कराया गया था इ। सके अलावा राजा जयसिंह ने चार वेधशालाएं स्थापित की। जिनमें से एक वेधशाला उज्जैन में स्थित है ।सम्राट विक्रमादित्य की राज्यसभा में नवरत्नों में से एक 12 मंदिर और उज्जैन में काल गणना का उल्लेख मिलता है।