27 अप्रैल 2026

मंडला :
मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध कान्हा टाइगर रिजर्व से वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक बहुत ही दुखद खबर आई है। पिछले पांच दिनों के भीतर टाइगर रिजर्व में तीन बाघ शावकों की मौत हो गई है। मरने वाले तीनों शावक ‘अमाही’ बाघिन (टी-141) के हैं। शावकों की उम्र लगभग एक साल बताई जा रही है। इस घटना ने पार्क प्रबंधन और वन्यजीव विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है।
कैसे हुई शावकों की मौत?
रिपोर्ट के अनुसार, दो शावकों की मौत पहले ही हो चुकी थी, जबकि तीसरे शावक का शव शनिवार शाम को मिला। इस शावक के शव को पोस्टमार्टम के लिए जबलपुर भेज दिया गया है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, बाघिन अमाही पिछले कुछ समय से काफी कमजोर हो गई है, जिसकी वजह से वह शिकार नहीं कर पा रही थी। आशंका जताई जा रही है कि शिकार न मिल पाने और भूख के कारण शावकों की जान गई है।
बाघिन अमाही की स्थिति भी नाजुक
शावकों की मां, बाघिन अमाही की सेहत भी बहुत खराब है। वह इतनी कमजोर हो चुकी है कि अपने चौथे शावक की देखभाल करने में भी असमर्थ दिख रही है। पार्क प्रबंधन अब बाघिन की जान बचाने की कोशिश में जुटा है और उसे ‘अतिरिक्त डाइट’ (Extra Diet) दी जा रही है ताकि वह दोबारा ताकत हासिल कर सके। विशेषज्ञों की एक टीम लगातार उसकी निगरानी कर रही है।
अप्रैल के महीने में अब तक 4 बाघों की मौत
कान्हा टाइगर रिजर्व के लिए अप्रैल का महीना बहुत भारी रहा है। इन तीन शावकों के अलावा, 5 अप्रैल को एक वयस्क बाघिन की भी मौत हुई थी। यानी इस अकेले महीने में अब तक कुल 4 बाघ अपनी जान गंवा चुके हैं।
घटनाक्रम पर एक नजर:
* 21 अप्रैल: अमाही बाघिन को अपने चार शावकों के साथ सरही जोन में देखा गया था।
* 23 अप्रैल: एक नर शावक का शव ईटावे नाला के पास मिला। आशंका है कि इसकी मौत भूख से हुई।
* रविवार: पार्क प्रबंधन ने अमाही बाघिन को ढूंढ निकाला और उसके चौथे शावक को रेस्क्यू किया। टीम ने बाघिन के रक्त और अन्य सैंपल लिए हैं ताकि किसी बीमारी की जांच की जा सके।
प्रबंधन की कार्रवाई
टाइगर रिजर्व प्रबंधन के मुताबिक, शावकों की मौत के सटीक कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चलेगा। फिलहाल प्राथमिकता अमाही बाघिन और उसके बचे हुए इकलौते शावक को सुरक्षित रखने की है। पार्क के डॉक्टर और फील्ड स्टाफ अमाही के स्वास्थ्य की जांच कर रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसकी कमजोरी की वजह केवल शिकार न कर पाना है या कोई संक्रमण।
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि टाइगर रिजर्व के भीतर शिकार की कमी या बाघों के आपसी संघर्ष जैसे पहलुओं पर भी बारीकी से गौर करने की जरूरत है।