28 जुलाई 2026:
नई दिल्ली:
सुप्रीम कोर्ट ने आज मंगलवार को दिल्ली और सभी राज्य सरकारों को यह निर्देश दिया कि सीजेपी के प्रदर्शन में जो भी छात्र 18 वर्ष से कम उम्र के हैं, जिनका कोई पहले आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है उन्हें तुरंत रिहा करें।
साथ ही अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि इन घटनाओं से जुड़े हुए सभी डिजिटल साक्ष्यों को पुलिस सुरक्षित रखें।
सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है ,जब संसद की ओर मार्च कर रहे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ विपक्ष ने 20 जुलाई को पेलेट गन के इस्तेमाल पर विरोध जताया था। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि NEET प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ पुलिस ने यदि ज्यादती की है तो इसकी निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराई जाए।
अदालत ने कहा कानून को अपने हाथ में जिसने भी लिया है ,उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। यदि प्रोटोकॉल का उल्लंघन होता है तो कानून को अपना काम करना चाहिए। प्रथम दृष्टि में यदि मामला किसी आयोग द्वारा पारदर्शी जांच का बने तो ऐसी स्थितियों से भविष्य में निपटने के लिए प्रोटोकॉल तैयार करने में मदद मिलनी चाहिए।
कई राज्यों से पुलिस की ज्यादितियों के मिले आरोप:
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बिहार में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कार्यों पर भी एक पुलिस अधिकारी ने एक-47 का इस्तेमाल किया था। अगले सोमवार तक सुप्रीम कोर्ट ने इसका जवाब मांगा है। इसके अलावा अधिकारियों को सीसीटीवी कैमरे, फेस रिकॉग्निशन सिस्टम और ड्रोन के माध्यम से एकत्रित किए गए डिजिटल रिकॉर्ड को भी सुरक्षित रखने के निर्देश दिए । अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि इन सामग्रियों को पब्लिक डोमेन पर नहीं रखना चाहिए।
पुलिस कर्मियों पर भी हुए हमले:
दिल्ली पुलिस की तरफ से पेश हुए जनरल तुषार मेहता ने कहा कि पुलिस पर अत्यधिक बल प्रयोग करने का आरोप लगे हैं ,किंतु इस विरोध प्रदर्शन के दौरान 250 से अधिक पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। इसकी भी जांच कराई जानी चाहिए कि यह हमले छात्रों द्वारा किए गए या किसी और के द्वारा।
उन्होंने बताया कि हिंसा उन उपद्रवियों के द्वारा की गई जो शांति पूर्ण प्रदर्शन में घुसपैठ कर गए थे।
इस पर जस्टिस जय माल्या बागची ने इस आंदोलन को हिंसा की तरफ जोड़ते हुए टिप्पणी की ,की शांतिपूर्ण भीड़ को बदनाम करने वाले लोग हमेशा प्रदर्शन में मौजूद रहते हैं। इस पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।


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