20 अप्रैल 2026
महू/इंदौर:

मध्य प्रदेश की धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत को नई ऊंचाइयों पर ले जाते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक बड़ी घोषणा की है। इंदौर जिले में स्थित भगवान परशुराम की जन्मस्थली ‘जानापाव’ को अब राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान दी जाएगी। यहाँ जल्द ही भगवान परशुराम और श्रीकृष्ण के जीवन को समर्पित एक भव्य ‘लोक’ का निर्माण किया जाएगा, जिस पर करीब 17.41 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
रविवार को भगवान परशुराम जन्मोत्सव के अवसर पर आयोजित ‘परशुराम प्रकटोत्सव’ में शामिल होने पहुंचे मुख्यमंत्री ने इस प्रोजेक्ट की जानकारी दी।

कैसा होगा ‘परशुराम और श्रीकृष्ण लोक’
जानापाव में बनने वाला यह लोक श्रद्धालुओं के लिए किसी आधुनिक तीर्थ से कम नहीं होगा। इसके विकास के लिए सरकार ने खास योजना तैयार की है:
परिसर में भगवान परशुराम और भगवान श्रीकृष्ण की विशाल कांस्य प्रतिमाएं (Bronze Statues) स्थापित की जाएंगी।
यहाँ एक अत्याधुनिक म्यूजियम बनाया जाएगा, जिसमें शास्त्रों और शस्त्रों के ज्ञान को दर्शाया जाएगा। इसमें शस्त्र दीर्घा, उत्पत्ति दीर्घा और ध्यान केंद्र भी होंगे।
पर्यटकों के स्वागत के लिए 30 फीट ऊँचा भव्य प्रवेश द्वार बनेगा। साथ ही चारों तरफ सुंदर लैंडस्केपिंग, व्यू पॉइंट और पैदल चलने के लिए पाथ-वे तैयार किए जाएंगे।
धार्मिक आयोजनों और कथाओं के लिए एक विशेष कथा मंच का निर्माण भी इस प्रोजेक्ट का हिस्सा है।
सात नदियों का उद्गम स्थल है जानापाव
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान जानापाव के भौगोलिक और आध्यात्मिक महत्व पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि यह स्थान चंबल, गंभीर, अजनार और चोरल जैसी साढ़े सात नदियों का उद्गम स्थल है। सरकार ने संकल्प लिया है कि वे गंभीर और अजनार जैसी नदियों को पुनर्जीवित करने के लिए भी काम करेंगे।
भगवान परशुराम: शस्त्र और शास्त्र के महागुरु
डॉ. मोहन यादव ने भगवान परशुराम को याद करते हुए कहा कि वे न केवल एक महान योद्धा थे, बल्कि शास्त्रों के ज्ञाता और ‘महागुरु’ भी थे। उन्होंने ही भीष्म, द्रोणाचार्य और कर्ण जैसे महान योद्धाओं को शिक्षा दी थी। मुख्यमंत्री ने परशुराम मंदिर में पूजा-अर्चना की और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना करते हुए ‘महाभारतकालीन अस्त्र-शस्त्र’ प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया।
इस घोषणा से क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। जानापाव का विकास होने से इसे उज्जैन के महाकाल लोक और ओरछा के राम राजा लोक की तर्ज पर एक प्रमुख धार्मिक केंद्र के रूप में देखा जा रहा है।