23 अप्रैल 2026
नई दिल्ली/वॉशिंगटन:
मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में जारी भारी तनाव के बीच एक राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रहे संघर्ष में युद्धविराम (सीजफायर) को अगले दो हफ्तों के लिए बढ़ा दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप का यह फैसला काफी चौंकाने वाला माना जा रहा है क्योंकि इससे पहले दोनों देशों के बीच युद्ध जैसे हालात बने हुए थे।
शांति प्रस्ताव तैयार करने का मौका
ट्रंप प्रशासन ने यह कदम इसलिए उठाया है ताकि ईरान को एक व्यापक शांति प्रस्ताव तैयार करने का पर्याप्त समय मिल सके। हालांकि जानकारों का मानना है कि ट्रंप का यह फैसला उनकी मजबूरी भी हो सकता है। अमेरिकी कानून (वॉर पावर एक्ट 1973) के तहत राष्ट्रपति संसद की मंजूरी के बिना अपनी सेना को सिर्फ 60 दिनों के लिए ही युद्ध क्षेत्र में रख सकते हैं, और यह समय सीमा 1 मई को खत्म हो रही है। इसी कानूनी अड़चन से बचने के लिए इसे शांति वार्ता का नाम दिया जा रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच पाकिस्तान की भूमिका पर भी सबकी नजरें थीं। दरअसल, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और वहां के सेना प्रमुख (फील्ड मार्शल) ने अमेरिका से आग्रह किया था कि जब तक एक ठोस शांति योजना तैयार न हो जाए, तब तक ईरान पर हमला न किया जाए। ट्रंप और पाकिस्तानी नेतृत्व के बीच दूसरे दौर की शांति वार्ता होने वाली थी, जो फिलहाल टल गई है। अब माना जा रहा है कि यह बातचीत अगले 36 से 72 घंटों में दोबारा शुरू हो सकती है।
ईरान ने टैंकरों पर की गोलीबारी
शांति की कोशिशों के बीच तनाव कम नहीं हुआ है। ईरान ने ओमान की खाड़ी (होरमुज जलडमरूमध्य) में तीन व्यापारिक जहाजों पर गोलीबारी की और उनमें से दो को अपने कब्जे में ले लिया है। इनमें से एक जहाज गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह आ रहा था। ईरान का आरोप है कि ये जहाज उसके समुद्री नियमों का उल्लंघन कर रहे थे।
ट्रंप का कड़ा रुख बरकरार
भले ही युद्धविराम बढ़ाया गया है, लेकिन ट्रंप का लहजा अब भी सख्त है। उन्होंने मंगलवार को एक बयान में कहा कि ईरान की सरकार पूरी तरह से टूट चुकी है और वह पाकिस्तान के माध्यम से केवल समय मांग रही है। ट्रंप ने साफ कर दिया कि अगर ईरान ने एक एकीकृत शांति प्रस्ताव पेश नहीं किया, तो अमेरिका अपनी कार्रवाई जारी रखेगा।
आगामी 1 मई की तारीख बहुत महत्वपूर्ण होने वाली है। यदि तब तक ईरान कोई ठोस प्रस्ताव नहीं देता, तो राष्ट्रपति ट्रंप को अपनी सैन्य रणनीति में बदलाव करना होगा। फिलहाल ईरान के बंदरगाहों की घेराबंदी और व्यापारिक जहाजों पर हमलों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार और सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।


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