नई दिल्ली
रूस से कच्चे तेल का भारी मात्रा में आयात करने वाले भारत समेत अन्य कई देशों को अमेरिकी प्रशासन ने एक बार फिर कड़ा संदेश दिया है l अमेरिकी सेनेटरों द्वारा पेश किए गए एक नए प्रस्ताव को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी मंजूरी दे दी है l इस प्रस्ताव के अंतर्गत रूस से तेल खरीदने वाले सभी देशों पर 100% तक का भारी भरकम आयात शुल्क लगाने का प्रावधान है l ट्रंप का कहना है कि इस कड़े कदम को उठाने के लिए यह बिल्कुल सही अवसर है राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार ट्रंप प्रशासन का यह रूप भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ता को और अधिक पेचीदा बना सकता हैl जानकारों का यह भी मानना है कि इस आक्रामक बयान बाजी के जरिए अमेरिका दरअसल भारत पर जल्द से जल्द ट्रेड डील फाइनल करने का दबाव बना रहा है l ऐसा इसलिए क्योंकि व्यापार समझौते से जुड़े अमेरिका के कई प्रस्तावों पर भारत ने अभी तक मुहर नहीं लगाई है l दूसरी ओर भारत द्वारा रूस से कच्चे तेल के आयात को कम करने के कोई संकेत नजर नहीं आ रहे हैं l
सिर्फ पांच देशों पर केंद्रित है यह प्रस्ताव
इस नए बिल का प्रस्ताव रखने वाले अमेरिकी सीनेटर रिचर्ड ब्लू मेंटल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह बताया कि इस नई व्यवस्था में पहले की नीतियों से कहीं ज्यादा असरदार साबित होगी l 100% टैरिफ के दायरे में मुख्य रूप से रूस से तेल लेने वाले बड़े पांच देशों को शामिल किया गया है, जिनमें भारत, चीन, स्लोवाकिया हंगरी और अजरबैजान शामिल हैl
यूरोपीय देशों को मिली राहत
अमेरिकी सीनेटर ब्लूमेंटल ने यह भी बताया कि गैस आयात के मामले में यूरोपीय देशों को इस दायरे से बाहर रखा गया है l क्योंकि रूसी गैस पर उनकी निर्भरता कुल आयात के 15% से भी कम है l
भारत का रुख
इस प्रस्तावित शुल्क को लेकर भारत सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया हैl हालांकि विदेश नीति के विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज से यह बयान बाजी ठीक नहीं है l भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवर सिब्बल ने इस मामले पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसा लगता है जैसे राष्ट्रपति ट्रंप बिना किसी ठोस वजह के भारत को अलग-थलग करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं l गौरतलब है कि राष्ट्रपति ट्रंप इससे पहले भी रुसी तेल खरीद को लेकर भारत पर कार्यवाही कर चुके हैं l अगस्त 2025 में ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 25 फ़ीसदी का अतिरिक्त अतिरिक्त शुल्क लगा दिया था जिसके बाद कुल टैरिफ की दर बढ़कर 50% पर पहुंच गई थी l


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