तमिलनाडु मिशन पर बीजेपी का बड़ा दांव:

khabar pradhan

संवाददाता

21 January 2026

अपडेटेड: 2:47 PM 0stGMT+0530

तमिलनाडु मिशन पर बीजेपी का बड़ा दांव:



तमिलनाडु में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए को मिला मजबूत सहयोगी:

टीटीबी दिनाकरण एनडीए में हुए शामिल:
भाजपा की priority लिस्ट में इस समय सबसे ऊंपर है तमिलनाडु जी हां..वही राज्य जहां डीएमके का दवदबा है, भाजपा का एजेंडा फेल हो जाता है। कहा जाता है कि साउथ की राजनीति नॉर्थ की राजनीति से 360 डिग्री अलग है। लेकिन इस इस वक्त की बड़ी राजनीतिक खबर तमिलनाडु से है, जहां विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की सियासत में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। भारतीय जनता पार्टी ने दक्षिण भारत में अपनी पकड़ मजबूत करने की दिशा में एक और अहम कदम बढ़ा लिया है।

दरअसल, तमिलनाडु में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए को एक मजबूत सहयोगी मिल गया है।  अम्मा मक्कल मुनेत्र कड़गम यानी AMMK के प्रमुख टीटीबी दिनाकरण अब आधिकारिक तौर पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन NDA में शामिल हो गए हैं।  बुधवार को राजधानी चेन्नई में आयोजित एक अहम राजनीतिक घटनाक्रम के दौरान दिनाकरण ने केंद्रीय मंत्री और तमिलनाडु के बीजेपी प्रभारी पीयूष गोयल की मौजूदगी में एनडीए का दामन थामा।  इस मौके पर दोनों नेताओं के बीच गर्मजोशी भरी मुलाकात देखने को मिली, जिसने साफ संकेत दे दिया कि बीजेपी तमिलनाडु को लेकर अब आक्रामक रणनीति पर काम कर रही है।

दरअसल, पिछले कुछ समय से इस गठबंधन के संकेत मिल रहे थे।‌ हाल ही में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई और टीटीबी दिनाकरण की एक बैठक हुई थी, जिसके बाद से ही राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई थी कि दिनाकरण जल्द ही एनडीए में शामिल हो सकते हैं.।  अब इन अटकलों पर पूरी तरह से मुहर लग गई है।

टीटीबी दिनाकरण कौन हैं और उनकी पार्टी का राजनीतिक महत्व क्या है.!

टीटीबी दिनाकरण ने साल 2018 में तमिलनाडु की दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता की पार्टी AIADMK से अलग होकर AMMK की स्थापना की थी।  उनकी पार्टी खुद को अम्मा यानी जयललिता की राजनीतिक विरासत का असली उत्तराधिकारी बताती रही है।  दिनाकरण का दावा रहा है कि उनकी राजनीति का केंद्र तमिलनाडु की जनता और उनके अधिकार हैं।  हालांकि, चुनावी सफलता की बात करें तो रास्ता आसान नहीं रहा।  साल 2024 के लोकसभा चुनाव में AMMK ने एनडीए के साथ मिलकर दो सीटों—थेनी और तिरुचिरापल्ली—से चुनाव लड़ा था, लेकिन दोनों ही सीटों पर पार्टी को हार का सामना करना पड़ा।  इसके बावजूद बीजेपी ने दिनाकरण को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया और उन्हें तमिलनाडु की राजनीति में एक प्रभावशाली चेहरा मानते हुए लगातार संपर्क बनाए रखा।  राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बीजेपी की यह रणनीति डीएमके के मजबूत किले को चुनौती देने की है। बीजेपी राज्य में बड़े दलों के साथ-साथ छोटे और क्षेत्रीय दलों को जोड़कर एक व्यापक एनडीए गठबंधन तैयार करना चाहती है, जिससे आने वाले विधानसभा चुनाव में डीएमके के सामने एक मजबूत विकल्प खड़ा किया जा सके।  टीटीबी दिनाकरण का एनडीए में शामिल होना इसी रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।  ये कदम न सिर्फ बीजेपी को जयललिता समर्थक वोट बैंक तक पहुंचने में मदद कर सकता है, बल्कि तमिलनाडु की राजनीति में त्रिकोणीय मुकाबले की संभावनाओं को भी मजबूत करता है।

अब बड़ा सवाल यही है कि क्या टीटीबी दिनाकरण का एनडीए में आना तमिलनाडु की सियासत में गेम चेंजर साबित होगा? और क्या बीजेपी डीएमके के दबदबे को चुनौती देने में सफल हो पाएगी?

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