6 मई 2026
नई दिल्ली:
पश्चिम बंगाल की राजनीति और भारत-बांग्लादेश के रिश्तों को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। बांग्लादेश की प्रमुख विपक्षी पार्टी, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीस्ता जल बंटवारे के समझौते में रोड़ा अटकाने का आरोप लगाया है।
बांग्लादेश में खालिदा जिया की पार्टी बीएनपी के नेताओं का कहना है कि तीस्ता नदी के पानी का मुद्दा पिछले कई सालों से अटका हुआ है। उनका दावा है कि केंद्र सरकार और बांग्लादेश के बीच बातचीत होने के बावजूद ममता बनर्जी के कड़े रुख के कारण यह समझौता अंजाम तक नहीं पहुंच पाया है। बीएनपी के वरिष्ठ नेता रूहूल कबीर रिजवी ने हाल ही में अपने बयानों में ममता बनर्जी की आलोचना की और उन्हें इस देरी का जिम्मेदार ठहराया।
भाजपा की जीत से क्यों खुश है बीएनपी?
इस खबर का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि बांग्लादेश की यह विपक्षी पार्टी बंगाल में भाजपा के बढ़ते प्रभाव या जीत की संभावनाओं को लेकर काफी उत्साहित नजर आ रही है। इसके पीछे मुख्य रूप से दो कारण माने जा रहे हैं:
1. तीस्ता समझौता: बीएनपी को लगता है कि अगर बंगाल में भाजपा की सरकार आती है, तो केंद्र और राज्य के बीच तालमेल बेहतर होगा। इससे सालों से लंबित तीस्ता जल समझौता जल्द पूरा हो सकता है।
2. ममता से नाराजगी: ममता बनर्जी ने हमेशा बंगाल के हितों का हवाला देकर तीस्ता के पानी को साझा करने का विरोध किया है। बीएनपी का मानना है कि ममता का जाना बांग्लादेश के लिए पानी के अधिकार पाने का रास्ता खोल सकता है।
तीस्ता नदी का विवाद क्यों है इतना अहम?
तीस्ता नदी सिक्किम और पश्चिम बंगाल से होकर बांग्लादेश में प्रवेश करती है। बांग्लादेश के उत्तरी हिस्से के लिए यह नदी सिंचाई और खेती का सबसे बड़ा जरिया है। बांग्लादेश चाहता है कि सूखे के दिनों में उसे पानी का एक निश्चित हिस्सा मिले, लेकिन पश्चिम बंगाल सरकार का तर्क है कि अगर ज्यादा पानी बांग्लादेश को दिया गया, तो उत्तर बंगाल के जिलों में खेती और बिजली उत्पादन पर बुरा असर पड़ेगा।
बीएनपी का यह रुख भारत और बांग्लादेश के कूटनीतिक रिश्तों में एक नया मोड़ दिखा रहा है। जहां एक तरफ ममता बनर्जी अपनी क्षेत्रीय राजनीति को प्राथमिकता दे रही हैं, वहीं बांग्लादेश की विपक्षी पार्टी को अब भाजपा से उम्मीदें नजर आने लगी हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि तीस्ता का पानी दोनों देशों के बीच रिश्तों में कितनी मिठास या कड़वाहट लेकर आता है।


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