26 जुलाई 2026 :
मध्य प्रदेश/ भोपाल/
ट्विशा शर्मा केस:
भोपाल:
ट्विशा शर्मा मामले में आरोपी सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह को कोर्ट से राहत नहीं मिली है। प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रसाद मिश्र ने उनकी जमानत अर्जी खारिज कर दी।
चार न्यायाधीशों की सुनवाई के बाद और चार दिन तक कोर्ट के चक्कर लगाने के बाद कल शनिवार को रिटायर्ड जिला जज गिरी वाला सिंह के जमानत बड़ी पर फैसला सुना दिया गया विशेष न्यायाधीश राम प्रताप कृष्ण ने उनके जमानत आवेदन को खारिज कर दिया।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जो भी साक्ष्य उपलब्ध हैं उनमें प्रथम दृष्टया आरोपी की भूमिका की ओर इशारा करते हैं और इस स्तर पर उन्हें जमानत देना उचित नहीं होगा।
बेल नहीं देने पर कोर्ट ने बताई वजह :
कोर्ट ने कहा कि विवेचना के दौरान एकत्र किए गए कॉल डिटेल रिकॉर्ड, वॉट्सऐप चैट, गवाहों के बयान और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य गिरिबाला सिंह की संलिप्तता को दर्शाते हैं। इसलिए मामले की गंभीरता को देखते हुए नियमित जमानत नहीं दी जा सकती। अदालत ने यह भी माना कि आरोपी सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश हैं और वर्तमान में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की अध्यक्ष के पद पर कार्यरत हैं। ऐसे में उनका प्रभावशाली पद पर होने के कारण उनके रिहा होने पर गवाहों को प्रभावित करने, साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने या न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप की आशंका हो सकती है।
अदालत ने यह भी आशंका जताई कि जमानत मिलने पर वह साक्ष्य को प्रभावित कर सकती हैं । इसलिए उन्हें जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता । साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि उनकी 100 वर्षीय मां की पूजा पाठ के आधार पर जमानत मांगना भी निराधार है।
गिरीबाला सिंह की स्वास्थ्य रिपोर्ट के आधार पर भी यह निर्धारित होता है कि वह किसी गंभीर बीमारी से भी पीड़ित नहीं है । जिसके आधार पर उन्हें जमानत दी जाए। आदेश में यह भी बताया गया है कि सीबीआई की जांच से अपराध में गिरीबाला सिंह की संलिप्तता भी सामने आती है।
विशेष न्यायाधीश राम प्रताप मिश्र ने 24 जुलाई को इस मामले की सुनवाई की और 25 जुलाई को फैसला सुनाया। सीबीआई को गिरिबाला और समर्थ के खिलाफ 22 अगस्त तक चालान पेश करना है । ऐसा नहीं होने पर दोनों को डिफॉल्ट बेल मिल सकती है।


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