16 अप्रैल 2026

जबलपुर:
जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में चल रही नर्सिंग ऑफिसर की भर्ती को लेकर एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि नर्सिंग ऑफिसर के पदों पर होने वाली भर्ती प्रक्रिया में पुरुष उम्मीदवारों को भी आवेदन करने की अनुमति दी जाए।

दरअसल, मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल ने सरकारी मेडिकल कॉलेजों में नर्सिंग ऑफिसर के 800 से ज्यादा पदों के लिए विज्ञापन निकाला था। इस विज्ञापन में इन सभी पदों को 100 प्रतिशत महिलाओं के लिए आरक्षित कर दिया गया था। संतोष कुमार लोधी और अन्य पुरुष उम्मीदवारों ने इस नियम को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।

हाई कोर्ट का अंतरिम आदेश
जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए पुरुष उम्मीदवारों को राहत दी है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ताओं को इस भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने का मौका दिया जाए और उनके आवेदन स्वीकार किए जाएं। हालांकि, कोर्ट ने यह भी साफ किया है कि इन उम्मीदवारों का चयन याचिका पर आने वाले अंतिम फैसले पर निर्भर करेगा।

याचिकाकर्ताओं की दलील
पुरुष उम्मीदवारों की ओर से पैरवी कर रहे वकील विशाल बघेल ने अदालत में तर्क दिया कि:
सरकारी नियमों के अनुसार नर्सिंग ऑफिसर के पद के लिए कोई जेंडर आधारित रोक नहीं है।
पुरुष और महिला दोनों एक ही तरह का नर्सिंग कोर्स (BSc नर्सिंग या GNM) करते हैं और उनके पास समान योग्यता व रजिस्ट्रेशन होता है।
भर्ती में पुरुषों को पूरी तरह बाहर रखना संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 का सीधा उल्लंघन है, जो रोजगार में समानता का अधिकार देते हैं।

इसी के साथ हाई कोर्ट ने एक और महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि मध्य प्रदेश में 16 साल से ज्यादा समय से काम कर रहे संविदा कर्मचारी भी उन सभी लाभों के हकदार हैं जो नियमित कर्मचारियों को मिलते हैं। कोर्ट ने साफ किया कि अनुबंध या आउटसोर्स के नाम पर लंबे समय से काम कर रहे कर्मचारियों को उनके अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता।
हाई कोर्ट ने अब इस पूरे मामले पर लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग और कर्मचारी चयन मंडल से जवाब मांगा है।