22 जुलाई 2026:मध्य प्रदेश/भोपाल/

मध्य प्रदेश विधानसभा में UCC विधेयक पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कड़ा रुख अपनाते हुए बहु विवाह और निकाह हलाला जैसी कुप्रथाओं पर तीखा प्रहार किया lउन्होंने स्पष्ट किया कि जो लोग महिलाओं और बहनों का जीवन नर्क बना रहे थे उन्हें अब कड़ी सजा भुगतनी पड़ेगी l अब पूरे प्रदेश में राम से लेकर रहीम तक सभी नागरिकों पर एक समान कानून लागू होगा l

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति की अंतिम स्वीकृति के बाद यह विधेयक कानून के रूप में पूरे राज्य में प्रभावित हो जाएगा l

कांग्रेस के हंगामे के बीच मुख्यमंत्री का वक्तव्य:

सदन की कार्यवाही के दौरान विपक्षी कांग्रेस विधायकों ने लगातार शोर शराबा मचाया लेकिन मुख्यमंत्री ने अपना संबोधन जारी रखा l डॉक्टर यादव ने कहा कि कांग्रेस तुष्टीकरण, मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति और जनता की पीठ में खंजर  भोकने का काम करती रही है l अब किसी भी धर्म विशेष के मनमाने नियम कानून थोपने की इजाजत नहीं होगी l

मध्य प्रदेश में लागू होने वाले UCC के प्रमुख प्रावधान:

न्यूनतम शादी की आयु :

शादी के न्यूनतम आयु पुरुषों के लिए 21 वर्ष और महिला के लिए 18 वर्ष तय की गई है इससे कम उम्र का विवाह गैर कानूनी माना जाएगा l

तलाक के नियम:

विवाह के 1 साल बाद ही तलाक की अर्जी दी जा सकेगी और तलाक केवल अदालत के जरिए ही मान्य होगा l

कुप्रथाओं पर पूर्ण प्रतिबंध:

बहु विवाह और हलाला पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है l

विवाह का पंजीयन अनिवार्य होगा:

विवाह कभी भी हुआ हो सभी को इसका रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा l इसके लिए 60 दिनों के भीतर आवेदन करना आवश्यक होगा l

रक्त संबंधों में विवाह पर रोक:

मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत नजदीकी रिश्तेदारों जैसे पुत्र की विधवा ,पुत्री की पुत्री, बहन की पुत्री, आदि में विवाह की जो अनुमति थी, वह अब समाप्त कर दी गई है l

लिव in के नियम हुए सख्त:

लिव इन में रहने वाले जोड़ों को एक महीने के भीतर रजिस्ट्रार के पास पंजीकरण करना होगा l रजिस्ट्रेशन न करने पर 3 महीने की जेल या ₹10000 का जुर्माना हो सकता है l यदि किसी ने लिव इन रिलेशनशिप का गलत इस्तेमाल या धोखाधड़ी की तो उसे 5 साल की जेल की सजा भुगत नहीं होगी l

जनजातीय समाज को राहत :

राज्य के जनजातीय आदिवासी समाज को UCC के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है l

संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि गुजरात ,उत्तराखंड और असम के बाद यह विधेयक मध्य प्रदेश  में एक बड़े जनमत संग्रह के आधार पर लाया गया है l सुप्रीम कोर्ट की सेवा निवृत न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित समिति ने सभी वर्गों से विचार विमर्श किया और 10 लाख से अधिक लोगों के मत प्राप्त होने के बाद इस विधेयक का प्रारूप तैयार किया गया है l

विपक्ष का पलटवार- सरकार 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण पर बात नहीं कर रही:

सदन के बाहर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए कहा प्रदेश में मुख्य विषय 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का है l जिस पर सरकार  चर्चा करने से भाग रही है l राज्य में 52 से 55% आबादी पिछड़ों की है l 13% पद रोक कर रखे गए हैं और युवा सड़कों पर धक्के खा रहे हैं l लेकिन सरकार आरएसएस के एजेंडे को पूरा करने के लिए UCC को प्राथमिकता दे रही है l

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