15 अप्रैल 2026
कटनी:
मध्य प्रदेश के कटनी रेलवे स्टेशन पर रविवार को ट्रेन से 163 बच्चों को ले जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अब इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) भी सक्रिय हो गई है। बच्चों को बिहार से महाराष्ट्र और कर्नाटक के मदरसों में ले जाया जा रहा था। पुलिस इस बात की पड़ताल कर रही है कि इन मदरसों में बच्चों को किस तरह की शिक्षा दी जा रही है।
महाराष्ट्र रवाना हुई पुलिस की टीमें
कटनी पुलिस की विशेष टीमें महाराष्ट्र के लातूर और विदर्भ के लिए रवाना हो गई हैं। पकड़े गए आठों आरोपियों ने पूछताछ में लातूर के ‘मदरसा जामिया अशरफिया अंजुमने इस्लामिया उद्गीर’ और विदर्भ के ‘दारुल उलूम इमदादिया मदरसा’ का नाम लिया है। पुलिस वहां जाकर इन संस्थानों के रिकॉर्ड और बच्चों को बुलाने के असली मकसद की जांच करेगी।
आरोपियों पर शक और फंडिंग की जांच
इस मामले में बिहार के अररिया जिले के 8 लोगों को पकड़ा गया है, जो खुद को शिक्षक बता रहे हैं। हालांकि, उनकी भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है क्योंकि बिहार में भी मदरसे संचालित हैं, फिर इतनी बड़ी संख्या में बच्चों को दूसरे राज्य क्यों ले जाया जा रहा था?
जांच एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि क्या ये लोग किसी कट्टरपंथी संगठन से जुड़े हैं।
पुलिस इस बात की भी गहराई से जांच कर रही है कि इन बच्चों की पढ़ाई और रहने का खर्च कौन उठा रहा है और इसके पीछे किन संगठनों का हाथ है।
बच्चों के माता-पिता पहुंचे कटनी
मंगलवार को बिहार के अररिया से करीब 54 बच्चों के अभिभावक कटनी पहुंचे। जीआरपी (GRP) ने उन्हें आश्रय गृह ले जाकर बच्चों से मिलवाया और उनके बयान दर्ज किए। फिलहाल बच्चों को बिहार के अररिया प्रशासन से रिपोर्ट मिलने के बाद ही उनके घर भेजा जाएगा।
आरोपियों को समाज के सुपुर्द किया गया
एक दिलचस्प मोड़ में, जीआरपी ने पकड़े गए आठों आरोपियों (सद्दाम, अमान उल्ला, मो. जाहिर, आमिर खान, हाफिज अबू तालिम, मो. इस्लाम, नौसाद और राशिद) को फिलहाल कटनी के मुस्लिम समुदाय के सुपुर्द कर दिया है। हालांकि, उन्हें शर्त दी गई है कि जांच के दौरान जब भी बुलाया जाएगा, उन्हें जीआरपी थाने में उपस्थित होना होगा।
पुलिस और खुफिया एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी हैं ताकि यह साफ हो सके कि यह मामला सिर्फ शिक्षा से जुड़ा है या इसके पीछे कोई और बड़ी साजिश है।


Leave a Reply