3 मई 2026
इंदौर:
मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर चल रहे विवाद के बीच एक नया और महत्वपूर्ण ऐतिहासिक सबूत सामने आया है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच में चल रही सुनवाई के दौरान एक ऐसा ब्रिटिश दस्तावेज़ पेश किया गया है, जो इस स्थान के प्राचीन स्वरूप पर नई रोशनी डालता है।
क्या कहता है ब्रिटिश कालीन दस्तावेज़
ब्रिटिश काल के अधिकारी और इतिहासकार सीई लुआर्ड ने साल 1912 में एक किताब लिखी थी, जिसका नाम था ‘धार एंड मांडू’। इस पुस्तक में उन्होंने स्पष्ट रूप से लिखा है कि भोजशाला मूल रूप से एक हिंदू मंदिर था। उनके शोध के अनुसार, बाद में इस मंदिर के अवशेषों का उपयोग करके यहां मस्जिद का निर्माण किया गया था।
पत्थरों पर दर्ज है शिक्षा का इतिहास
सीई लुआर्ड की इस रिपोर्ट में केवल मंदिर होने का जिक्र नहीं है, बल्कि वहां मिलने वाले शिलालेखों (पत्थरों पर लिखी इबारत) का भी विस्तार से वर्णन है:
1. संस्कृत व्याकरण के नियम: भोजशाला के भीतर मिले शिलालेखों पर संस्कृत व्याकरण के नियम उकेरे गए हैं।
2. संगीत और नाटक: पत्थरों पर प्राकृत भाषा के गीत और नाट्य संदर्भ मिलते हैं, जो इस स्थान को एक बड़े सांस्कृतिक केंद्र के रूप में दर्शाते हैं।
3. व्यवस्थित शिक्षा केंद्र: शिलालेखों पर वर्णमाला, संज्ञा और क्रिया के रूप लिखे मिले हैं, जो इस बात का सबूत हैं कि 11वीं-12वीं सदी में यह एक बहुत बड़ा स्कूल या विद्या केंद्र था, जिसे राजा भोज ने बनवाया था।
इतिहास का बदला हुआ स्वरूप
दस्तावेज़ के अनुसार, हालांकि आज यह स्थान मस्जिद के रूप में दिखाई देता है, लेकिन इसकी जड़ें एक प्राचीन हिंदू शिक्षण संस्थान और मंदिर से जुड़ी हुई हैं। किताब में यह भी बताया गया है कि केवल धार्मिक दृष्टिकोण से ही नहीं, बल्कि शैक्षणिक और ऐतिहासिक रूप से भी इस स्थान का महत्व बहुत अधिक रहा है।
कोर्ट में सुनवाई के दौरान सामने आए इन ऐतिहासिक तथ्यों ने भोजशाला के मामले को और भी दिलचस्प बना दिया है। अब यह देखना होगा कि ये दस्तावेज़ आने वाले समय में कानूनी फैसले पर क्या प्रभाव डालते हैं।


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