27 जुलाई 2026:
मध्य प्रदेश/ भोपाल/

भोपाल शहर के ट्राइबल म्यूजियम में बुंदेली और भगौरिया नृत्य की आकर्षक प्रस्तुति  देखने को मिली। संभावना के तहत यहां आदिवासी कलाकारों ने इसे पेश किया। भील जनजातीय भगोरिया नृत्य प्रताप सिंह और दिवारी नृत्य विक्रमसिंह बुन्देला और साथियों ने यह प्रस्तुति दी है। यहां झाबुआ और अलीराजपुर में भील जनजाति का भगोरिया नृत्य यहां पेश किया गया। भील युवक और युवती शामिल रहे। यह फागुन के मौसम में होली से पूर्व भगोरिया हाटों के आयोजन के दौरान होगा। इसकी प्रस्तुति ट्रायबल म्यूजियम में देखने को मिली।, रंग-बिरंगी वेशभूषा में महिलाओं ने चक्रीपाली तथा पिरामिड नृत्य किया जो आकर्षक का केन्द्र रहा।

वहीं बुंदेलखंड का पारंपरिक लोकनृत्य और मार्शल आर्ट दिवारी दर्शकों को यहां देखने को मिला। ये दीपावली और गोवर्धन पूजा के मौके पर होता है। भगवान श्री कृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने और ग्वालों की परंपरा से जुड़ा हुआ है। पीले रंग के वस्त्र पहने नृतकों हाथ बांस की लाठियां थी और सिर पर मोर पंख। ढोल-नगाड़ों की थाप पर करतब दिखाते हुए यह प्रस्तुति की गई। दो सौ से ज्यादा लोक कलाकार इस मौके पर मौजूद थे।

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