20 जुलाई 2026: सोमवार:
मध्य प्रदेश/भोपाल

मध्य प्रदेश की लोक संस्कृति और क्षेत्रीय संस्कृतियों
को अब अकादमिक पहचान देने की तैयारी शुरू हो गई है। इस दिशा में संस्कृति विभाग के अधीन संचालित दो विश्वविद्यालयों और 11 शासकीय कला महाविद्यालयों में आदिवासी, बघेली, बुंदेली, मालवा और निमाड़ अंचल की लोककलाओं पर आधारित नए सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किए जाएंगे। विभागीय मंत्री ने अधिकारियों को नए पाठ्यक्रम तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इनका प्रारूप इसी साल तैयार होगा, जिससे अगले शैक्षणिक सत्र से इन्हें शुरू किया जा सके।
इन कोर्स को शुरू करने का उद्देश्य प्रदेश की पारंपरिक लोककलाओं और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण करते हुए युवाओं और स्थानीय प्रतिभाओं को औपचारिक प्रशिक्षण देना है।

संस्कृति विभाग का मानना है कि इससे क्षेत्रीय कला विधाओं को नई पहचान मिलेगी और कौशल आधारित अवसर बढ़ेंगे। साथ ही विश्वविद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने, लंबित मामलों के निराकरण और रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया तेज करने पर भी फोकस रहेगा। अभी वर्तमान में राजा मान सिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय में 122 और सांची बौद्ध भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय में 16 पाठ्यक्रम संचालित हैं। इन लोक संस्कृतियों और क्षेत्रीय संस्कृतियों को विरासत के तौर पर सहेजने में यह कदम प्रभावी होगा।

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