29 जुलाई 2026:
मध्य प्रदेश/भोपाल/

मध्यप्रदेश में मूंग की 100 प्रतिशत सरकारी खरीदी फसलों के उचित दाम और खाद वितरण व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन अब भोपाल तक पहुंच गया है । नर्मदापुरम से शुरू हुई किसानों की पदयात्रा के बाद हजारों किसान राजधानी में धरने पर बैठ गए हैं। किसानों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।  कई किसान अपने साथ राशन-पानी लेकर पहुंचे हैं।  धरना स्थल से सामने आई तस्वीरों में किसान सड़क पर सोते, दाल-बाटी बनाते और गीतों के जरिए एक-दूसरे का हौसला बढ़ाते नजर आए‌ ।
मंगलवार देर रात कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना और किसान नेताओं के बीच हुई बैठक बेनतीजा रही।  इसके बाद किसानों ने मुख्यमंत्री निवास घेराव का ऐलान किया।

इधर, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मूंग खरीदी का लक्ष्य बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखा है। सीएम मोहन यादव ने कहा कि सरकार किसानों के साथ है और उनकी समस्याओं का समाधान बातचीत से निकाला जाएगा।
उन्होंने बताया कि किसानों से संवाद के लिए एक कमेटी बनाई गई है, जो लगातार उनकी बात सुन रही है।

ट्रैफिक व्यवस्था की डाइवर्ट:
आंदोलन के चलते 11 मील, कटारा हिल्स, बाग सेवनिया और नर्मदापुरम रोड समेत कई इलाकों में ट्रैफिक प्रभावित हुआ है।  प्रशासन ने बैरिकेडिंग कर कई रूट डायवर्ट किए हैं।

क्यों उतरे किसान सड़कों पर:
मध्य प्रदेश की राजधानी कल मंगलवार को किसानों के बड़े आंदोलन का केंद्र बन गई। हजारों किसान राजधानी भोपाल में सड़कों पर उतर आए। शाम तक तो हालात ऐसे बने कि किसान बेरीकटिंग तोड़कर मुख्यमंत्री निवास तक पहुंचने लगे। तभी किसानों के इन बढ़ते हुए कदमों को रोकने के लिए प्रशासन को पुलिस तैनात करना पड़ा।

भोपाल की सड़कों पर किसान, चारों तरफ बैरिकेडिंग, ट्रैफिक जाम और आखिर किसान क्यों सड़कों पर उतरे हैं और सरकार ने अब तक क्या कदम उठाए हैं ।
मध्यप्रदेश में मूंग की 100 प्रतिशत सरकारी खरीदी की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है।  नर्मदापुरम से शुरू हुई किसानों की पदयात्रा मंगलवार को भोपाल पहुंची, जहां हजारों किसान बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय के सामने नर्मदापुरम रोड पर धरने पर बैठ गए। किसानों का कहना है कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक वह आंदोलन जारी रखेंगे।
किसानों का दिखा अलग ही पहलू:
कई किसान अपने साथ सात दिन का राशन, पानी और जरूरी सामान लेकर पहुंचे हैं।‌ किसानों की तैयारी देखकर साफ है कि वे लंबे समय तक आंदोलन जारी रखने के मूड में हैं । धरना स्थल पर किसानों की अलग-अलग तस्वीरें भी सामने आईं। कई किसान सड़क पर चादर बिछाकर सोते नजर आए।  वहीं, कुछ किसान मिलकर खाना बनाते दिखे। धरना स्थल पर ही चूल्हे जलाए गए और दाल-बाटी तैयार की गई।

किसानों का कहना है कि यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा और वे अपनी मांगों को लेकर डटे रहेंगे । आंदोलन के बीच कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हुए, जिनमें किसान और समर्थक गीत गाते हुए नजर आए। कोई गीतों के जरिए जोश बढ़ाता दिखा तो कोई साथ मिलकर हौसला बनाए रखने की कोशिश करता नजर आया। इन तस्वीरों ने आंदोलन का एक अलग पहलू दिखाया।

कृषि मंत्री अटल सिंह कंसाना और किसान नेताओं के बीच हुई बातचीत:
मंगलवार देर रात कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना और किसान नेताओं के बीच करीब एक घंटे बातचीत हुई, लेकिन बैठक में कोई सहमति नहीं बन सकी ।  किसान नेताओं का कहना है कि सरकार की तरफ से अभी तक कोई ठोस फैसला नहीं आया है। इसके बाद किसानों ने बुधवार को मुख्यमंत्री निवास घेराव का ऐलान किया । किसानों की सबसे बड़ी मांग मूंग की पूरी यानी 100 प्रतिशत सरकारी खरीदी है ।

मूंग का उत्पादन इस वर्ष हुआ बेहतर:
सूत्रों के मुताबिक  किसानों का कहना है कि इस साल मूंग का उत्पादन अच्छा हुआ है, लेकिन सरकारी खरीदी की सीमा कम होने से कई किसान परेशान हैं । किसानों के मुताबिक प्रति एकड़ उत्पादन के मुकाबले खरीदी काफी कम तय की गई है, जिसके कारण उन्हें अपनी उपज कम कीमत पर बेचने का डर है…
इधर, मध्यप्रदेश सरकार भी केंद्र सरकार से मूंग खरीदी का लक्ष्य बढ़ाने की मांग कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर प्रदेश के लिए खरीदी का कोटा बढ़ाने का अनुरोध किया है।

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