9 अगस्त 2026:
मध्य प्रदेश/ भोपाल:
मप्र की राजधानी भोपाल में 90 हजार से ज्यादा दुकानें, शोरूम और मॉल नगर निगम की आंख की किरकिरी बन गए हैं…वजह है कोर्ट का आदेश ।
हजारों दुकानों , शोरूम पर कार्रवाई का खतरा:
भोपाल में इस समय स्थानीय रहवासी और व्यापारियों कारोबारियों के बीच बड़ी जद्दोजहद का वक्त है…और दोनों आमने सामने आ चुके हैं….क्योंकि कोर्ट के आदेश के बाद रिहायशी इलाकों में चल रही हजारों दुकानों, शोरूम और दूसरे कारोबार पर कार्रवाई का खतरा मंडरा रहा है…… सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद नगर निगम भी अब एक्शन की तैयारी में आ चुका है ।
समस्या के समाधान के लिए बनाई गई समिति:
समस्या के समाधान के लिए जो समिति बनाई गई थी‌ , उसको भी कोर्ट ने अवमानना मानते हुए रद्द  कर दिया है…भोपाल में रिहायशी इलाकों में कई सालों से बिना अनुमति के कई commercial गतिविधियां चल रही थीं जिन पर नगर निगम बुल्डोजर कार्रवाई करने जा रहा है।

आपको बता दें रिहायशी इलाकों में सिर्फ 15 प्रतिशत व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को ही कमर्शियल अनुमति मिली है…ऐसे में नियमों के मुताबिक कार्रवाई हुई तो 90 हजार से ज्यादा दुकानें, शोरूम और मॉल इसकी जद में आ सकते हैं….इसका असर सीधे तौर पर 4 लाख से ज्यादा लोगों के रोजगार पर पड़ सकता है…दरअसल, कई लोगों ने सरकारी प्रक्रियाओं से बचने के लिए अपने घरों में ही दुकान, ऑफिस या दूसरा कारोबार शुरू कर लिया । लेकिन बिना अनुमति शुरू किया गया यही कारोबार अब परेशानी का कारण बन सकता है । विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर कारोबार शुरू करने से पहले संबंधित जमीन का लैंड यूज यानी भू-उपयोग नियमों के तहत बदलवा लिया जाता, तो कई मामलों में कानूनी तौर पर commercial गतिविधि की जा सकती थी ।  टी एंड सीपी अधिनियम की धारा 29 और 30 के तहत आवासीय क्षेत्रों में कुछ परिस्थितियों में व्यावसायिक अनुमति लेने का प्रावधान है । लेकिन मंजूर ले-आउट में बिना अनुमति कारोबार शुरू करने पर अब कार्रवाई हो सकती है।

शहर में ऐसे कई रिहायशी इलाके हैं, जहां नियमों के विपरीत मॉल और बड़े शोरूम तक संचालित किए जा रहे हैं । सरकार भूमि विकास नियमों में बदलाव कर रही है, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक इसका फायदा भोपाल के उन इलाकों को मिलने की उम्मीद कम है, जहां निगम कार्रवाई कर रहा है । क्योंकि ये इलाके पहले से मंजूर और विकसित रिहायशी क्षेत्र हैं…नए संशोधन का फायदा मुख्य रूप से उन क्षेत्रों को मिलेगा, जहां नया परिक्षेत्र तय किया जा रहा है।  ले-आउट मंजूर होने के बाद नियमों का उल्लंघन होने पर कार्रवाई का अधिकार नगर निगम के पास है । अब बात उन गतिविधियों की, जिन्हें रिहायशी इलाकों में पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है । 18 मीटर से कम चौड़ी सड़क पर मैरिज हॉल या बैंक्वेट हॉल नहीं चलाया जा सकता । इसके अलावा भारी मशीनरी, ऑटोमोबाइल गैरेज, वेल्डिंग वर्कशॉप और रसायनों का storage भी Prohibited है । थोक मंडी, बड़े गोदाम, और बिना पार्किंग वाले बड़े कोचिंग सेंटर  पर भी रोक है । ऐसा नहीं है कि रिहायशी इलाकों में हर तरह का कारोबार प्रतिबंधित है । अगर सड़क की चौड़ाई, पार्किंग और भूखंड का आकार नियमों के मुताबिक है, तो कुछ सीमित गतिविधियों की अनुमति ली जा सकती है । इनमें किराना, मेडिकल, स्टेशनरी, डेयरी, ब्यूटी पार्लर, टेलरिंग और लॉन्ड्री जैसी दुकानें शामिल हैं । वहीं डॉक्टर, वकील, सीए, आर्कीटेक्ट और IT Consultant जैसे प्रोफेशनल्स के ऑफिस भी नियमों के तहत चलाए जा सकते हैं ।

यानी भोपाल में अब मामला सिर्फ दुकान या कारोबार चलाने का नहीं है । सबसे जरूरी है ये देखना कि जिस जमीन पर कारोबार हो रहा है, उसका लैंड यूज क्या है और क्या उस गतिविधि की अनुमति है । क्योंकि नियमों का पालन नहीं किया गया, तो अब कार्रवाई से बचना आसान नहीं होगा ।

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