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6 जुलाई 2026 :
मध्य प्रदेश:

मध्य प्रदेश से एक ऐसा फैसला सामने आया है, जिसकी चर्चा पूरे देश में हो रही है। पहली बार वक्फ बोर्ड में दो हिंदू सदस्यों को जगह दी गई है।आखिर सरकार ने यह फैसला क्यों लिया और नए कानून में क्या बदलाव हुआ है।  सरकार ने वक्फ संशोधन अधिनियम-2025 के तहत राज्य वक्फ बोर्ड का नया गठन  कर दिया है।  इस संबंध में 4 जुलाई 2026 को आधिकारिक अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। एक सरकारी अधिकारी ने समाचार एजेंसी PTI को बताया कि नए वक्फ कानून के तहत बोर्ड का पुनर्गठन करने वाला मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य है। सरकार का कहना है कि इस नए बोर्ड के जरिए वक्फ संस्थाओं के कामकाज में ज्यादा पारदर्शिता और सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। इस नए बोर्ड की सबसे बड़ी खास बात यह है कि पहली बार दो हिंदू सदस्यों को भी इसमें शामिल किया गया है‌ इंदौर के मनोज मालपानी और गुना के राघौगढ़ के अनिमेश भार्गव को बोर्ड का सदस्य बनाया गया है।

नए नियम के अनुसार:

नए वक्फ कानून के अनुसार अब हर राज्य के वक्फ बोर्ड में कम से कम दो गैर-मुस्लिम सदस्यों का होना जरूरी है। मध्य प्रदेश सरकार ने वक्फ बोर्ड की 10 सदस्यीय नई टीम बनाई। वहीं, सनवर पटेल को एक बार फिर मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया है।
पुराने नियम में संशोधन:
.अगर पुराने नियमों की बात करें, तो वक्फ अधिनियम 1995 के तहत बोर्ड के सभी सदस्य मुस्लिम समुदाय से ही होते थे।  सरकार कुछ सदस्यों को नामित जरूर करती थी, लेकिन वे भी मुस्लिम समुदाय से ही होते थे।  अब नए संशोधन कानून के बाद यह व्यवस्था बदल गई है और गैर-मुस्लिम सदस्यों को भी बोर्ड में शामिल करने का रास्ता खुल गया है। नए बोर्ड में कई प्रमुख नाम भी शामिल किए गए हैं‌  इनमें नजमा हेपतुल्ला, भोपाल उत्तर के विधायक आतिफ अकील, उज्जैन के फैजान खान, इंदौर की फातेमा चौधरी, बैरसिया की पार्षद शाइस्ता सुल्तान, रतलाम की पार्षद शबाना खान और पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण आयुक्त को भी सदस्य बनाया गया है।  नजमा हेपतुल्ला का कार्यकाल अप्रैल 2028 तक रहेगा।
सरकार का कहना है कि नए कानून का उद्देश्य सिर्फ बोर्ड का गठन बदलना नहीं है, बल्कि इसके कामकाज को ज्यादा पारदर्शी, जवाबदेह और व्यवस्थित बनाना भी है।  सरकार का मानना है कि अलग-अलग वर्गों की भागीदारी से फैसले ज्यादा संतुलित होंगे और वक्फ संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन किया जा सकेगा।‌ सरकार का कहना है कि यह कानून व्यवस्था में सुधार और पारदर्शिता लाने के लिए बनाया गया है।

फिलहाल, मध्य प्रदेश ने सबसे पहले नए कानून के तहत वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन कर एक नई शुरुआत की है।  अब देश के दूसरे राज्यों की भी नजर इस बात पर रहेगी कि वे इस कानून को कब और किस तरह लागू करते हैं…… यही वजह है कि मध्य प्रदेश का यह फैसला अब पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है।‌


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