14 जुलाई 2026:
मध्य प्रदेश/भोपाल/
मध्यप्रदेश में अब लिव-इन रिलेशनशिप में रहना अब आसान नहीं होगा…इसी मॉनसून सत्र में यूसीसी विधेयक सरकार लाने जा रही है…जिसका फाइनल ड्राप्ट समिति ने सीएम मोहन यादव को सौंप दिया है । लिव-इन में रहने वालों को रजिस्ट्रार के सामने पंजीयन कराना अनिवार्य होगा। रजिस्टार अपनी ओर से एक कापी संबंधित थाने को भेजेंगे। सरकार लिव इन में रहने वालों के अभिभावकों को भी यह जानकारी देगी। बिना पंजीयन लिव-इन में रहना अपराध की श्रेणी में आएगा। इसके लिए जेल भी जाना पड़ सकता है। समिति ने सिफारिशें की हैं कि इसमें सभी धर्मों के लोगों के लिए विवाह पंजीयन अनिवार्य, मौखिक और प्रथागत तलाक को कानूनी दंड के दायरे में लाना, कोर्ट से होने वाले तलाक ही मान्य करना भी है। तीन खंडों वाले इस ड्राफ्ट को कानूनी पहलुओं पर परखने सरकार ने विधि विभाग को भेजा है। कानूनी जानकार बताते हैं, सरकार चाहे तो कई सिफारिशें मानने से इनकार कर सकती है, कुछ नए विषय जोड़ भी सकती है। हर धर्म में पति या पत्नी के जीवित रहते या कानूनन तलाक न होने तक दूसरी शादी में पूरी तरह रोक रहेगी। बहुविवाह अपराध होगा । इसके अलावा बेटे-बेटियों को संपत्ति के उत्तराधिकार में समान कानूनी अधिकार मिलेंगे। अब दायरे में सभी धर्मों के लोग आएंगे।
सरकार इस विधानसभा के मानसून सत्र में UCC बिल लाने जा रही है। जिसकी घोषणा मुख्यमंत्री मोहन यादव पहले ही कर चुके हैं। इस ड्राफ्ट में कई विषय और कई सिफारिशें हैं, जिसमें से सरकार कुछ विषयों को अलग भी कर सकती है और कुछ अन्य विषय जोड़ भी सकती है।
इस UCC विधेयक में आदिवासी सहित कई संकटग्रस्त और विशेष पिछड़ी जातियों को बाहर रखने की सिफारिश भी की गई है। इसके बारे में मुख्यमंत्री मोहन यादव पहले ही कह चुके हैं।


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