13 मार्च 2026
भोपाल। मध्यप्रदेश में दूध में मिलावट रोकने के लिए सरकार सख्त कदम उठाने जा रही है। अब प्रदेश में डेयरी कारोबार करने के लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। इसके तहत दूध उत्पादकों और विक्रेताओं का पंजीकरण किया जाएगा, ताकि मिलावटी दूध पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके।
राज्य सरकार ने दूध और दूध उत्पादों में मिलावट रोकने के लिए यह व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। इसके तहत दूध के कारोबार से जुड़े लोगों की निगरानी की जाएगी और नियमित निरीक्षण भी किए जाएंगे। इससे मिलावटखोरी पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी।
दूध उत्पादकों और विक्रेताओं का रजिस्ट्रेशन होगा
मध्य प्रदेश सरकार सभी दूध उत्पादकों और विक्रेताओं की पहचान करेगी। जो अब तक रजिस्टर्ड नहीं है, अब उन्हें लाइसेंस लेकर अपना रजिस्ट्रेशन करना होगा और साथ ही दूध संग्रह, परिवहन और भंडारण में उपयोग होने वाले सभी उपकरणों की जांच भी की जाएगी, ताकि दूध की स्वच्छता और गुणवत्ता को सुनिश्चित किया जा सके । अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि दूध में मिलावट रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई की जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं।
कामधेनु योजना से प्रोत्साहन मिलेगा
साथ ही दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार की ओर से प्रोत्साहन योजनाएं भी चलाई जा रही हैं। डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के तहत 25 गायों की यूनिट स्थापित करने पर करीब 10 लाख रुपये तक की प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान किया गया है।
प्रदेश देश के प्रमुख दुग्ध उत्पादक राज्यों में शामिल है और कुल दूध उत्पादन में लगभग 9 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है। सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था से दूध की गुणवत्ता बेहतर होगी और उपभोक्ताओं को शुद्ध दूध उपलब्ध हो सकेगा।


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