4 अगस्त 2026:
बिहार:
बिहार के बांकीपुर सीट पर बीजेपी की हार ने कई प्रश्न चिह्न लगा दिये हैं कि आखिर इतनी पारंपरिक सीट कैसे हाथ से निकल गई जिस पर अभी कुछ महीने पहले तक बीजेपी का ही कब्जा था….एक समय जिन सीटों को बीजेपी का अभेद्य किला माना जाता था, अब वहीं से बड़े-बड़े सियासी उलटफेर देखने को मिल रहे हैं ।

आईए जाने किन विधानसभा उपचुनाव में राष्ट्रीय राजनीति के किले ढहे:
पिछले कुछ सालों में कौन-कौन से ऐसे किले ढहे, जिन्होंने राष्ट्रीय राजनीति की तस्वीर बदल दी है, बिहार के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में प्रशांत किशोर की बड़ी जीत ने बीजेपी को मंथन करने पर मजबूर कर दिया है । यह सीट सिर्फ एक विधानसभा सीट नहीं थी, बल्कि बीजेपी का मजबूत गढ़ मानी जाती थी । इस सीट पर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का ही नहीं बल्कि उनके परिवार भी राजनीतिक प्रभाव रहा है । ऐसे में इस हार की चर्चा पटना से लेकर दिल्ली तक हो रही है।

बिहार के बांकीपुर सीट का इतिहास:

बांकीपुर सीट पर बीजेपी साल 1995 से 2025 तक लगातार 9 चुनाव जीतती रही थी ।  पहले 1995 से 2005 तक नितिन नवीन के पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा यहां विधायक रहे । इसके बाद 2006 के उपचुनाव से लेकर 2025 तक लगातार नितिन नवीन चुनाव जीतते रहे । लेकिन 2026 के उपचुनाव में प्रशांत किशोर ने इस लंबे रिकॉर्ड को तोड़ दिया और बीजेपी से यह सीट छीन ली । हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब बीजेपी को अपने मजबूत गढ़ में हार का सामना करना पड़ा हो ।

बीजेपी का गढ़ माने जाने वाले किले को मिली चुनौती:
  पिछले कुछ वर्षों में ऐसे कई चुनाव हुए हैं, जहां विपक्ष ने बीजेपी को उसके सबसे सुरक्षित माने जाने वाले इलाकों में भी मात दी । सबसे पहले बात करते हैं उत्तर प्रदेश की गोरखपुर लोकसभा सीट की। वर्ष 2018 में हुए उपचुनाव में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार प्रवीण निषाद ने बीजेपी को हराया था । यह चुनाव योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद लोकसभा सीट खाली होने पर हुआ था । 
गोरखपुर बीजेपी का मजबूत गढ़ माना जाता था। पार्टी यहां 1991, 1996, 1998, 1999, 2004, 2009, 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव जीत चुकी थी । इसलिए इस हार को बीजेपी के लिए बड़ा झटका माना गया ।
  साल 2018 में उत्तर प्रदेश की फूलपुर लोकसभा सीट पर भी बीजेपी को हार मिली ।  समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार नागेंद्र सिंह पटेल ने बीजेपी के कौशलेंद्र सिंह पटेल को हराया ।  यह सीट केशव प्रसाद मौर्य के उपमुख्यमंत्री बनने के बाद खाली हुई थी । बीजेपी यहां 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव जीत चुकी थी, लेकिन उपचुनाव में विपक्ष ने बाजी मार ली । राजस्थान की अजमेर लोकसभा सीट भी बीजेपी का मजबूत गढ़ मानी जाती रही है ।  वर्ष 2018 के उपचुनाव में कांग्रेस के रघु शर्मा ने बीजेपी उम्मीदवार रामस्वरूप लांबा को चौरासी ,414 वोटों से हराया ।  बीजेपी इस सीट पर अब तक 8 बार जीत दर्ज कर चुकी थी, लेकिन उपचुनाव में उसे हार का सामना करना पड़ा ।

राजस्थान की अलवर लोकसभा सीट:
इसी तरह राजस्थान की अलवर लोकसभा सीट पर भी 2018 के उपचुनाव में कांग्रेस ने जीत दर्ज की । कांग्रेस उम्मीदवार डॉ. करण सिंह यादव ने बीजेपी के डॉ. जसवंत सिंह यादव को हराया । बीजेपी इस सीट पर 1991, 1999, 2014, 2019 और 2024 में जीत हासिल कर चुकी थी, लेकिन उपचुनाव में उसका किला ढह गया ।
बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट:
अब इसी सूची में बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट भी जुड़ गई है । करीब 30 साल तक बीजेपी के कब्जे में रहने वाली यह सीट अब प्रशांत किशोर के खाते में चली गई है।

इस जीत ने बिहार की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा शुरू कर दी है और साथ ही यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि क्या मजबूत गढ़ों में भी अब चुनावी तस्वीर बदल रही है ।
गोरखपुर, फूलपुर, अजमेर, अलवर और अब बांकीपुर—इन सभी चुनावों ने यह दिखाया कि जब स्थानीय मुद्दे, उम्मीदवार और चुनावी माहौल बदलता है, तो सबसे मजबूत राजनीतिक किले भी ढह सकते हैं।

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