क्या Whatsapp होगा बंद:
सुप्रीम कोर्ट ने Meta और Whatsapp को लगाई फटकार:
संवाददाता
3 February 2026
अपडेटेड: 5:40 PM 0rdGMT+0530
सुप्रीम कोर्ट ने व्हाट्सएप और मेटा को निजी जानकारी शेयर करने पर दी कड़ी चेतावनी:
सुप्रीम कोर्ट ने व्हाट्सएप और मेटा को कड़ी चेतावनी दी है। कोर्ट ने कहा है कि डाटा शेयरिंग के नाम पर देश के नागरिकों की निजता के साथ खिलवाड़ नहीं किया जा सकता।
यह टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट की तरफ से तब आई है, जब कोर्ट ने व्हाट्सएप की ‘टेक इट ऑर लीव इट’ प्राइवेट पॉलिसी पर लगी पेनल्टी के खिलाफ अपील पर सुनवाई कर रहा था।
सुप्रीम कोर्ट ने लगाई कड़ी फटकार:
कोर्ट ने साफ कहा है कि इस तरह की पॉलिसी से यूजर्स की प्राइवेट जानकारी लीक होती है । इस केस की सुनवाई जस्टिस संजीव खन्ना की बेंच कर रही है। इस सुनवाई के दौरान टेक कंपनियों की चालाकी पर सवाल उठाए गए । उन्होंने कहा कि प्राइवेसी टर्म इतने जटिल तरीके से लिखे जाते हैं कि आम आदमी समझ नहीं पाता। साफ करके देखा जाए तो देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट ने व्हाट्सएप और उसकी पैरंट कंपनी मेटा डाटा शेयरिंग को लेकर कड़ी फटकार लगाई है।
लोगों की निजता से हो रहा खिलवाड़:
कोर्ट ने साफ कहा है कि डाटा शेयरिंग के नाम पर लोगों की निजता के साथ खिलवाड़ नहीं हो सकता । अदालत ने यह भी साफ कर दिया है और सबसे जरूरी है किसी भी कंपनी को यह अधिकार नहीं कि वह यूजर्स की निजी जानकारी दूसरी कंपनियों के साथ शेयर करें ।
इस दौरान कोर्ट का रुख काफी सख्त नजर आया। कोर्ट ने स्पष्ट कहा डेटा सुरक्षा कोई छोटी बात नहीं है । यह सीधे लोगों की आजादी और अधिकारों से जुड़ा मामला है। अगर कंपनी यूजर्स की जानकारी का गलत इस्तेमाल करती है , तो यह कानून और संविधान दोनों के खिलाफ जाएगा।
व्हाट्सएप की ओर से वकीलों ने दलील दी, कि ऐसे मामलों में यूजर्स के पास डाटा शेयरिंग से मना करने का ऑप्शन हो सकता है । यानि अगर कोई शर्त कुबूल नहीं करना चाहता तो वह सेवा का इस्तेमाल न करें ।
कोर्ट ने दिखाई नाराजगी:
लेकिन कोर्ट ने इस तरफ से संतुष्ट नहीं हुआ चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने इस सख्त सवाल उठाए । कोर्ट ने कहा कि क्या आम आदमी वास्तव में इन शब्दों को समझ पाता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि सड़क किनारे सब्जी बेचने वाली महिला, आपके टर्म और कंडीशन को कैसे समझेंगी।
क्या कंपनियों को अंदाजा है कि किस तरह की जटिल भाषा में शर्ते लिखी जाती है ।
कोर्ट ने कहा कंपनियों को है मुनाफे की चिंता:
कोर्ट में यह माना कि ऐसी कानूनी भाषा आम लोगों के लिए समझना आसान नहीं है । सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में मेटा और व्हाट्सएप पर यह भी टिप्पणी की कंपनियों को सिर्फ अपने मुनाफे की चिंता होती है। आज कंपनियां जानती हैं कि लोग व्हाट्सएप्प के आदी हो चुके हैं । हर वर्ग के लोग बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक इस ऐप का इस्तेमाल करते हैं । ऐसे में यूजर्स के पास ज्यादा ऑप्शन भी नहीं होते और इस स्थिति का फायदा उठाकर अगर कंपनियां यूजर्स का डाटा इकट्ठा करती है या शेयर करती हैं तो यह गलत है।
कोर्ट में साफ कहा कि लोगों की जानकारी का इस तरह इस्तेमाल करना कतई कबूल नहीं किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट में पहले भी कई बार कह चुका है की प्राइवेसी या निजात एक मौलिक अधिकार है और इसको लीक करने का किसी को भी अधिकार नहीं है डिजिटल दौर में जब ज्यादातर बातचीत पेमेंट और निजी जानकारी एप्स के जरिए होती हैं, तब डेटा सुरक्षा और भी जरूरी हो जाता है। अगर कंपनियां बिना साफ सहमति की जानकारी शेयर करती हैं तो सीधे यूजेस के अधिकारों का उल्लंघन है और इसलिए अदालत इस मामले को बेहद गंभीरता से देख रही है।