कैबिनेट के फैसले से किसानों को राहत
मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों के हित में बड़ा फैसला लेते हुए करीब 10,500 करोड़ रुपये की योजनाओं का विस्तार अगले पांच साल के लिए कर दिया है। विधानसभा के बजट सत्र के बीच हुई कैबिनेट बैठक में इन योजनाओं को मंजूरी दी गई। सरकार का कहना है कि इससे खेती की लागत कम होगी और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।

सरसों और उड़द पर बोनस देने का प्रस्ताव
बैठक में सरसों के लिए भावांतर योजना और उड़द की खरीद पर प्रति क्विंटल 600 रुपये बोनस देने का प्रस्ताव भी मंजूर किया गया। सरकार का मानना है कि इससे किसानों को फसलों का बेहतर दाम मिलेगा और उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। यह कदम किसानों को बाजार के उतार-चढ़ाव से बचाने के उद्देश्य से लिया गया है।

पंचायतों को सौंपी गई नल-जल योजना की जिम्मेदारी
कैबिनेट ने यह भी तय किया कि सिंगल नल-जल योजनाओं का संचालन अब पंचायतें करेंगी। पहले यह जिम्मेदारी लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के पास थी। सरकार का तर्क है कि स्थानीय स्तर पर संचालन होने से पानी की सप्लाई बेहतर होगी और जवाबदेही बढ़ेगी।

इन योजनाओं को मिला विस्तार
सरकार ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन, नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग और राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन जैसी योजनाओं को वर्ष 2031 तक जारी रखने का फैसला किया है। इन योजनाओं का उद्देश्य सिंचाई बढ़ाना, उत्पादन में वृद्धि, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा और खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता हासिल करना है।

खेती में तकनीक और प्राकृतिक तरीकों पर जोर
सरकार का कहना है कि इन योजनाओं के जरिए ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई को बढ़ावा दिया जाएगा, साथ ही प्राकृतिक खेती के दायरे का विस्तार किया जाएगा। इससे मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, रासायनिक खाद पर निर्भरता कम करने और पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलने की उम्मीद है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने का लक्ष्य
इन फैसलों को ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। सरकार का दावा है कि इससे किसानों की आय, रोजगार और कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी। वहीं विपक्ष ने इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि जमीन पर परिणाम दिखना जरूरी है।