ईरान का बड़ा फैसला: हार्मुज से गुजरने वाले सभी जहाजों पर लगेगा टैक्स:
संवाददाता
31 March 2026
अपडेटेड: 5:12 PM 0stGMT+0530
31 मार्च 2026
अमेरिका इजरायल vs ईरान:
हार्मोन स्टेट से गुजरने वाले सभी जहाज पर ईरान लगाएगा टैक्स:
पश्चिम एशिया की जंग के बीच अब ईरान ने चौतरफा कमाई का रास्ता ढूंढ़ निकाला है। ईरान की संसद की सुरक्षा समिति ने ऐसा फरमान दिया है जिससे ईरान की बंपर कमाई होने जा रही है। इसे कहते हैं आपदा में अवसर ढूंढ़ना।
हार्मुज स्ट्रीट से गुजरने वाले जहाज पर टोल लगाने का प्रस्ताव:
होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों की टोल वसूली के लिए एक प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। लेकिन इसका असर भारत पर क्या पड़ेगा।
जहां से भारत का तेल और गैस आयात किया जाता है,और अचानक उसे बंद कर दिया जाए तो हमारी रोजमर्रा की जिंदगी पर, हमारे उद्योग और ईंधन की कीमतों पर कैसा असर पड़ेगा। यही बड़ा सवाल है और सबसे बड़ी चुनौती भी है।
अब भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती के रूप में ये समस्या खड़ी है। ईरान की संसद ने होर्मुज में टोल वसूली को हरी झंडी दिखा दी है। इससे भारत पर की सप्लाई चेन पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं.। क्योंकि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूली का फैसला कर लिया है,यह जानकारी ईरान की सरकारी मीडिया आईआरआईबी ने दी है।
अमेरिका इजरायल के जहाज पर रहेगा बैन:
इराक में फॉर्मल स्ट्रीट से गुजरने वाले सभी जहाज पर टोल लगाने का जो फैसला किया है उसे पर ईरान को उसकी राष्ट्रीय मुद्रा रियाल में टोल देना होगा। इसके अलावा अमेरिका और इजराइल से जुड़े जहाज की एंट्री पर बना रहेगा यानी अमेरिका और इजरायल के जहाज की एंट्री पर रोक लगाई जाएगी।
.हालांकि ईरान का कहना है कि यह टोल सिर्फ वसूली के लिए नहीं, बल्कि सुरक्षा जहाजों की सुरक्षा और पर्यावरण की रक्षा को ध्यान में रखकर लगाया जाएगा अब हर वो जहाज जो होर्मुज से होकर गुजरेगा, उसे भुगतान करना होगा । इसका असर सिर्फ ईरान की कमाई पर नहीं, बल्कि भारत जैसे देशों की सप्लाई चेन पर भी पड़ेगा। ज्वाइंट मैरीटाइम इंफॉर्मेशन सेंटर के आंकड़ों के अनुसार, युद्ध जैसी स्थिति से पहले रोजाना लगभग 125-138 मालवाहक जहाज होर्मुज से गुजरते थे इनमें तेल टैंकर, एलपीजी और एलएनजी टैंकर और कार्गो जहाज शामिल थे । अनुमान है कि इस टोल से ईरान को सालाना 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक की कमाई हो सकती है । इस समय भारत के लिए यह रास्ता अब थोड़ा मुश्किल हो गया है । युद्ध शुरू होने से पहले भारत का लगभग 55% कच्चा तेल, 40% एलपीजी और 50% एलएनजी इसी मार्ग से आता था। इसके अलावा कार्गो आयात और निर्यात भी इस मार्ग पर काफी हद तक निर्भर है।
हार्मुज एक समुद्री रास्ता नहीं बल्कि ऊर्जा और व्यापार की रीढ़ है:
इसका मतलब यह है कि होर्मुज सिर्फ एक समुद्री रास्ता नहीं, बल्कि भारत की ऊर्जा और व्यापार की रीढ़ है । अब भारत को इस नए फैसले से कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है । सबसे पहले, तेल और गैस की कीमतें बढ़ सकती हैं, क्योंकि जहाजों को टोल देना होगा और वह खर्च अंततः भारत तक पहुंच जाएगा। इससे पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतें बढ़ सकती हैं । और आम लोगों की जेब पर असर पड़ेगा सप्लाई चेन भी प्रभावित हो सकती है। कंपनियां अधिक खर्च के कारण अपने मार्ग बदल सकती हैं । या आयात-निर्यात की योजना में बदलाव कर सकती हैं ।
इसका मतलब यह है कि माल समय पर न पहुँचना, स्टॉक की कमी और व्यापार पर दबाव बढ़ सकता है ।इसके अलावा भारत को वैकल्पिक मार्गों और नई रणनीतियों पर तेजी से काम करना होगा सप्लाई चेन प्रभावित न हो, इसके लिए नए रास्ते, परिवहन साधन और योजना बनाना जरूरी होगा । कूटनीतिक स्तर पर भी भारत को सक्रिय रहना होगा। ईरान, खाड़ी और पश्चिमी देशों के साथ संबंधों को संतुलित करना जरूरी है। ताकि व्यापार और ऊर्जा की सुरक्षा बनी रहे विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यह बदलाव भारत की आर्थिक स्थिरता, महंगाई और व्यापार पर असर डाल सकता है ।
ईरान के टोल से भारत पर असर:
यह केवल ईरान का टोल नहीं, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए चुनौती है । अब सवाल यही है भारत इस नई स्थिति के लिए कितनी जल्दी और सही कदम उठाएगा । क्या सरकार समय रहते वैकल्पिक रास्ते, नीति और कूटनीति के जरिये आम लोगों और व्यापार को सुरक्षित रख पाएगी। समय ही बताएगा कि यह चुनौती संकट बनी रहेगी या भारत इसे अवसर में बदल पाएगा । अब भारत को ईरान, खाड़ी और पश्चिमी देशों से कूटनीतिक संबंधों को बदली परिस्थितियों में नए सिरे से दुरुस्त करना होगा।