भोजशाला प्रकरण: हाई कोर्ट में अब होगी ‘डे-टू-डे’ सुनवाई, 6 अप्रैल से हर रोज रखी जाएंगी दलीलें

khabar pradhan

संवाददाता

3 April 2026

अपडेटेड: 4:39 PM 0rdGMT+0530

भोजशाला प्रकरण: हाई कोर्ट में अब होगी ‘डे-टू-डे’ सुनवाई, 6 अप्रैल से हर रोज रखी जाएंगी दलीलें

3 अप्रैल
धार/इंदौर:
मध्य प्रदेश के धार जिले की ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर चल रहे विवाद में एक अहम प्रगति हुई है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अब रोजाना सुनवाई करने का फैसला किया है। गुरुवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने साफ किया कि इस केस से जुड़े सभी पक्षों को विस्तार से सुना जाएगा।

6 अप्रैल से शुरू होगी नियमित सुनवाई
जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच ने आदेश दिया है कि 6 अप्रैल से दोपहर 2:30 बजे से इस मामले की हर रोज सुनवाई होगी।
सबसे पहले याचिकाकर्ताओं की दलीलें सुनी जाएंगी।
इसके बाद आपत्ति दर्ज कराने वाले पक्षों को अपनी बात रखने का मौका मिलेगा।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और ASI सर्वे
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में दखल देते हुए स्पष्ट कर दिया था कि मामले का अंतिम फैसला हाई कोर्ट ही करेगा।
कोर्ट के पास अब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की सर्वे रिपोर्ट और वीडियोग्राफी मौजूद है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया है कि जब तक सुनवाई चल रही है, भोजशाला परिसर के वर्तमान स्वरूप में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। साथ ही, 7 अप्रैल 2003 के एएसआई के आदेश का पालन जारी रहेगा।

दिग्गज वकीलों की मौजूदगी
इस हाई-प्रोफाइल मामले में दोनों पक्षों की ओर से देश के नामी वकील पैरवी कर रहे हैं:
हिंदू पक्ष: ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ की तरफ से अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन और विनय जोशी कोर्ट में मौजूद रहे। याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने उम्मीद जताई है कि नियमित सुनवाई से न्याय जल्द मिलेगा।
मुस्लिम पक्ष: ‘मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी’ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के जरिए जुड़े।
एएसआई की सर्वे रिपोर्ट सभी पक्षों को पहले ही दी जा चुकी है, जिस पर कई पक्षों ने अपनी आपत्तियां भी दर्ज कराई हैं। अब हाई कोर्ट इन सभी तकनीकी और ऐतिहासिक पहलुओं की बारीकी से जांच करेगा।

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