MP में मरीजों के लिए खुशखबरी; ‘ई-सुश्रुत’ सिस्टम से आसान होगा इलाज, रसीद कटते ही पता चलेगा डॉक्टर का नाम
संवाददाता
6 April 2026
अपडेटेड: 3:58 PM 0thGMT+0530
6 अप्रैल 2026
भोपाल:
मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में अब इलाज कराने की प्रक्रिया को हाईटेक बनाया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों में ‘ई-सुश्रुत’ (e-Sushrut) नाम का एक नया सॉफ्टवेयर सिस्टम लागू करने की तैयारी कर ली है। इस बदलाव से मरीजों को अस्पताल में लंबी लाइनों में लगने और इधर-उधर भटकने से निजात मिलेगी।
पर्चा बनते ही मिलेगी पूरी जानकारी
इस नए सिस्टम की सबसे बड़ी खूबी यह है कि जैसे ही मरीज रजिस्ट्रेशन काउंटर पर अपना पर्चा बनवाएगा, रसीद पर ही उसे जानकारी मिल जाएगी कि उसे किस कमरे में जाना है और उसे कौन-सा डॉक्टर देखेगा। यही नहीं, डॉक्टर को भी अपने कंप्यूटर स्क्रीन पर पता चल जाएगा कि उसके पास अगला मरीज कौन आने वाला है।
मेडिकल कॉलेज से पीएचसी तक लागू होगा सिस्टम
अधिकारियों के अनुसार, मेडिकल कॉलेजों से संबद्ध अस्पतालों से लेकर जिला अस्पताल, सिविल अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) तक, हर स्तर पर मरीजों को ऑनलाइन सुविधाएं दी जाएंगी। इसके लिए राज्यभर के अस्पतालों में ई-सुश्रुत सॉफ्टवेयर इंस्टॉल किया जा रहा है।
‘ई-सुश्रुत’ से मरीजों को क्या-क्या फायदे होंगे?
अस्पतालों को पूरी तरह ऑनलाइन और पेपरलेस बनाने की इस पहल से कई अहम फायदे होंगे:
घर बैठे डॉक्टर को दिखाने के लिए समय लिया जा सकेगा।
अस्पताल से छुट्टी मिलने पर सभी कागज ऑनलाइन मिलेंगे।
मरीजों को लैब के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे, वे अपनी जांच रिपोर्ट मोबाइल या कंप्यूटर पर देख सकेंगे।
मरीज को अगर दूसरे अस्पताल रेफर किया जाता है, तो उसके सारे डिजिटल दस्तावेज आसानी से ट्रांसफर हो जाएंगे।
जांच रिपोर्ट और इलाज के दस्तावेज मरीज की ‘आभा’ (आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन) आईडी से सुरक्षित रहेंगे।
प्रबंधन को भी मिलेगी मदद:
इस सिस्टम से अस्पताल प्रबंधन को भी यह जानने में आसानी होगी कि किस तरह की बीमारी के मरीज ज्यादा आ रहे हैं और कौन-सी दवाओं की खपत अधिक है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
यह पूरा प्रोजेक्ट स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सा शिक्षा विभाग के समन्वय से चलाया जा रहा है। ई-सुश्रुत को एडवांस कंप्यूटिंग (सी-डैक) ने तैयार किया है। इससे पहले एनआईसी के सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जा रहा था, लेकिन उसमें सुविधाएं काफी सीमित थीं। नए सिस्टम से प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है।