अनिल अंबानी समूह पर CBI का शिकंजा: 73,000 करोड़ की धोखाधड़ी का दावा, रडार पर सरकारी अफसर भी

khabar pradhan

संवाददाता

7 April 2026

अपडेटेड: 3:46 PM 0thGMT+0530

अनिल अंबानी समूह पर CBI का शिकंजा: 73,000 करोड़ की धोखाधड़ी का दावा, रडार पर सरकारी अफसर भी

7 अप्रैल 2026

नई दिल्ली:
रिलायंस अनिल अंबानी समूह (RAG) की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने सुप्रीम कोर्ट में एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया है। सीबीआई का दावा है कि वह अनिल अंबानी समूह के खिलाफ दर्ज 7 मामलों में कुल 73,000 करोड़ रुपये की बैंक ऋण धोखाधड़ी की जांच कर रही है।
इस मामले ने उस वक्त और तूल पकड़ लिया जब जांच एजेंसियों ने संकेत दिए कि इस खेल में केवल बिजनेसमैन ही नहीं, बल्कि कुछ बड़े सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत भी हो सकती है।
सीबीआई और ईडी की स्टेटस रिपोर्ट में बड़े खुलासे
सुप्रीम कोर्ट में फरवरी में दाखिल की गई स्टेटस रिपोर्ट के आधार पर मामले की गंभीरता को समझा जा सकता है:
सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कोर्ट को बताया कि नुकसान का आंकड़ा मामूली नहीं है। अलग-अलग मामलों को जोड़कर यह राशि करीब 73,006 करोड़ रुपये तक पहुंचती है।
ईडी ने दावा किया है कि उसने कुछ ऐसे अहम दस्तावेज बरामद किए हैं, जिनसे पता चलता है कि दिवालियापन  की कार्यवाही जानबूझकर घुमा-फिराकर शुरू की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट का सख्त निर्देश: ‘होगी पारदर्शी जांच’
सुप्रीम कोर्ट ने रिलायंस अनिल अंबानी समूह से जुड़ी वित्तीय गड़बड़ियों के आरोपों की समयबद्ध और पारदर्शी जांच के निर्देश दिए हैं।
कोर्ट ने ईडी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि IBC (दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता) कार्यवाही के तहत फंडिंग के लिए 8 गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) का इस्तेमाल किया गया। हैरानी की बात यह है कि लगभग 2,983 करोड़ रुपये के दावों का निपटारा महज 26 करोड़ रुपये में कर दिया गया।

सरकारी अफसरों की भूमिका भी जांच के दायरे में
जांच एजेंसियां अब इस बात की भी गहराई से छानबीन कर रही हैं कि इतने बड़े लोन फ्रॉड में किन अधिकारियों ने नियमों को ताक पर रखा। सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि कुछ सरकारी कर्मियों की संदिग्ध भूमिका की भी जांच की जा रही है।
प्रोजेक्ट हेल्प’ और विशेष जांच दल (SIT)
ईडी ने इन मामलों की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (Special Investigation Team) बनाया है, जो वर्तमान में समूह से जुड़े 8 अलग-अलग मामलों पर काम कर रही है।
जांच के दौरान ‘प्रोजेक्ट हेल्प’ का भी जिक्र आया है, जो कथित तौर पर दिवालियापन की कार्यवाही को प्रभावित करने से जुड़ा संकेत देता है।

ए.एस. सरमा द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने अब इस मामले की अगली तारीख 30 अप्रैल तय की है। फिलहाल, रिलायंस अनिल अंबानी समूह की ओर से इन गंभीर आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। 73,000 करोड़ की यह राशि आम जनता के टैक्स और बैंकों के जमा पैसे से जुड़ी है, इसलिए इस जांच के नतीजे बैंकिंग सेक्टर के लिए बहुत महत्वपूर्ण होंगे।

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