16 मई 2026

नई दिल्ली:
आम जनता की जेब पर एक बार फिर महंगाई की मार पड़ी है। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और संघर्ष के बीच सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर तक की भारी बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। पिछले कई सालों के बाद यह पहला मौका है जब पेट्रोल-डीजल के दामों में एक साथ इतनी बड़ी वृद्धि की गई है। इस बढ़ोतरी के तुरंत बाद दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों में सीएनजी की कीमतों में भी 2 रुपये प्रति किलो का इजाफा हो गया है।
इस अचानक हुई बढ़ोतरी से न सिर्फ आम लोगों का बजट बिगड़ेगा, बल्कि माल ढुलाई महंगी होने के कारण आने वाले दिनों में खाने-पीने की चीजों और रोजमर्रा के सामानों की कीमतें भी बढ़ सकती हैं।
क्यों बढ़े अचानक दाम?
भारत अपनी जरूरत का करीब 87 फीसदी कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) दूसरे देशों से आयात यानी खरीदता है। ऐसे में जब भी पश्चिम एशिया या दुनिया के किसी हिस्से में राजनीतिक तनाव बढ़ता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगती हैं।
पिछले एक साल के आंकड़ों को देखें तो कच्चे तेल की कीमत जो पहले 62 से 76 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थी, वह इस साल फरवरी में ईरान पर अमेरिकी-इजरायली तनाव के बाद दोगुनी महंगी हो गई है। मौजूदा समय में कच्चा तेल 104 से 110 डॉलर प्रति बैरल के ऊंचे स्तर पर बना हुआ है, जिसका सीधा असर अब भारत के घरेलू बाजार पर देखने को मिल रहा है।
भोपाल सहित अन्य राज्यों में क्या हैं नए दाम?
इस बढ़ोतरी के बाद मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पेट्रोल की कीमत बढ़कर 109.71 रुपये प्रति लीटर हो गई है, जबकि डीजल के दाम 94.88 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गए हैं।
देश के अलग-अलग राज्यों में टैक्स (वैट) की दरें अलग होने के कारण कीमतों में भी काफी अंतर देखने को मिल रहा है। इस समय देश के कुछ हिस्सों जैसे अंडमान में पेट्रोल की कीमत करीब 85 रुपये प्रति लीटर है, तो वहीं आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में यह 113 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है। राजधानी दिल्ली की बात करें तो वहां नई कीमतें लागू होने के बाद पेट्रोल 94.77 रुपये से बढ़कर 97.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87.67 रुपये से बढ़कर 90.67 रुपये प्रति लीटर हो गया है। वहीं दिल्ली में सीएनजी की नई कीमत 79.09 रुपये प्रति किलो हो गई है।
तेल कंपनियों को हो रहा था भारी नुकसान
नीतिगत तौर पर देश में सरकारी तेल कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और एलपीजी के दाम खुद तय करने की छूट मिली हुई है, लेकिन जमीनी तौर पर चुनावी मौसम या संवेदनशील समय में कीमतें अक्सर स्थिर रखी जाती हैं। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी कुछ दिन पहले संकेत दिए थे कि खुदरा कीमतें न बढ़ने की वजह से तेल मार्केटिंग कंपनियों को रोजाना करीब 1000 करोड़ रुपये का भारी घाटा उठाना पड़ रहा था।
कंपनियों को पेट्रोल पर 24 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 42 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से कम रिकवरी हो रही थी। सिर्फ दो महीनों के भीतर ही कंपनियों को पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री पर 1.90 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का अंडर-रिकवरी नुकसान झेलना पड़ा है। कंपनियों का कहना है कि साल 2022 में यूक्रेन युद्ध के समय भी उन्होंने लंबे समय तक कीमतें नहीं बढ़ाई थीं, लेकिन अब घाटे की भरपाई और अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण दामों को बढ़ाना बेहद जरूरी हो गया था।