20 मई 2026:
खबर प्रधान डेस्क:
ईरान/ तेहरान:
ईरान होर्मुज स्ट्रीट को सिर्फ तेल और गैस की वजह से ही नहीं बल्कि होर्मुज स्ट्रीट को एक मोहरे के रूप में इस्तेमाल करना चाहता है। इसका सबसे बड़ा कारण है होर्मुज स्ट्रीट के नीचे बिछी इंटरनेट की केबल, जिसे वह अपनी ताकत के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश करता है। यह वही केबल है, जिनके जरिए यूरोप एशिया और खाड़ी देशों के बीच इंटरनेट बैंकिंग और डिजिटल डाटा का एक बड़ा हिस्सा चलता है।
जानकारी के अनुसार ईरान ने संकेत दिए हैं कि वह होर्मुज के नीचे से गुजरने वाली इन C- केबलों के इस्तेमाल के बदले गूगल ,माइक्रोसॉफ्ट, मेटा और अमेजॉन जैसी कंपनियों से टैरिफ वसूलना चाहता है।
ईरान के सैन्य प्रवक्ता इब्राहिम जुल्फा घरी ने कहा कि यदि कंपनियां टेरिफ नहीं देगी तो इंटरनेट ट्रैफिक प्रभावित हो सकती है । उनके केबलों की मरम्मत और रखरखाव का अधिकार केवल ईरानी कंपनी को देने की बात भी कही गई है।
जो समुद्र के नीचे बिछी हुई ये केबल पूरी दुनिया के इंटरनेट सिस्टम की रीढ़ मानी जाती है। अगर उनमें कोई भी व्यवधान आता है तो न सिर्फ इंटरनेट की स्पीड पर बल्कि पूरे वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है।
भारत को भी हो सकता है खतरा:
इनमें से ज्यादातर केबलों को ओमान की तरफ बिछाई गई है लेकिन ‘फाल्कन’ और ‘जीबीआई’ नाम की दो केबिल ऐसी है जो ईरान के समुद्री क्षेत्र से भी गुजरती है ।अगर इन्हें नुकसान हुआ तो भारत के आईटी और आउटसोर्सिंग सेक्टर को अरबों डॉलर का नुकसान हो सकता है।
पाकिस्तान ने सऊदी में 8000 सैनिक और जेट भेजे:
पाकिस्तान ने सऊदी अरब में अपने 8000 सैनिकों लड़ाकू विमान की एक स्क्वाड्रन पर एयर डिफेंस सिस्टम की तैनाती की है। यह कदम दोनों देशों के बीच आपसी रक्षा समझौते के तहत उठाया गया है जानकारी के अनुसार यह तैनाती युद्ध के लिए तैयार बोल के रूप में भी की जा सकती है।
ईरान ने यह दावा किया है कि अमेरिका शांति वार्ता के दौरान ईरानी कच्चे तेल पर लगे प्रतिबंधों में अस्थाई डील देने को तैयार है । ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि कूटनीतिक रास्ते अभी बंद नहीं हुए हैं और पाकिस्तान की मध्यस्थता में बातचीत अभी जारी है। ईरान किसी भी समझौते में ठोस सुरक्षा आश्वासन चाहता है। जिसमें यूएई का नाम लिए बिना मंत्रालय ने कहा कि कुछ बाहरी तत्व क्षेत्र में हालात भड़काने की कोशिश कर सकते हैं।


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