29 मई 2026
भोपाल:
उर्दू शायरी की दुनिया के चमकते सितारे और पद्मश्री से सम्मानित मशहूर शायर डॉ. बशीर बद्र अब हमारे बीच नहीं रहे. उन्होंने गुरुवार, 28 मई 2026 को दोपहर 12 बजे भोपाल में अंतिम सांस ली. वह 91 वर्ष के थे और पिछले लगभग 14 सालों से डिमेंशिया (स्मृतिभ्रम) और उम्र से जुड़ी अन्य बीमारियों से जूझ रहे थे. उनके निधन की खबर से पूरे साहित्य जगत में शोक की लहर दौड़ गई है और उर्दू अदब की दुनिया में एक गहरा सन्नाटा पसर गया है.
गुरुवार शाम को ही भोपाल के बड़ा बाग कब्रिस्तान (ईदगाह हिल्स स्थित टॉकीज कब्रिस्तान) में नम आंखों से उन्हें सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया. उनके बेटे तैयब बद्र ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से उनकी तबीयत लगातार बिगड़ रही थी.
मेरठ के दंगों ने दिया था गहरा जख्म, छोड़ना पड़ा था घर
डॉ. बशीर बद्र का जन्म 15 फरवरी 1935 को अयोध्या में हुआ था. उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) से बीए, एमए और पीएचडी की पढ़ाई पूरी की और फिर मेरठ कॉलेज में करीब 17 वर्षों तक अध्यापन का कार्य भी किया.
लेकिन साल 1987 में मेरठ में हुए दर्दनाक दंगों ने उनके जीवन को पूरी तरह बदल दिया. उन दंगों में उपद्रवियों ने उनका मेरठ वाला घर पूरी तरह जलाकर खाक कर दिया था. इस हादसे से दुखी होकर उन्होंने मेरठ छोड़ दिया और भोपाल आकर बस गए. डॉ. बशीर बद्र का सबसे मशहूर शेर इसी दर्द की बानगी पेश करता है:
“लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में,
तुम तरस नहीं खाते बस्तियां जलाने में…”
भोपाल आने के बाद डॉ. राहत से निकाह कर वह पूरी तरह यहीं के होकर रह गए थे. उनके परिवार में उनकी पत्नी, बेटा तैयब और पुत्री शामिल हैं.
गजलों को महलों से निकालकर आम लोगों तक पहुंचाया
डॉ. बशीर बद्र की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि उन्होंने गजल को कठिन शब्दों की बंदिशों से आजाद कराया. उन्होंने बेहद आसान और आम बोलचाल के शब्दों का इस्तेमाल करके शायरी को सीधे लोगों के दिलों तक पहुंचाया. उनकी शायरी में मोहब्बत का पैगाम और जिंदगी जीने के सरल सूत्र छिपे होते थे. उनके लिखे कई शेर जैसे ‘उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो…’, ‘कोई हाथ भी न मिलाएगा जो गले मिलोगे तपाक से…’, और ‘तुम नहीं तो जिंदगी में और क्या रह जाएगा…’ आज भी लोगों की जुबान पर रहते हैं.
उर्दू साहित्य में उनके इसी बेमिसाल योगदान के लिए उन्हें संगीत नाटक अकादमी सहित कई सर्वोच्च सम्मानों और पद्मश्री से नवाजा गया था.
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जताया गहरा दुख
डॉ. बशीर बद्र के निधन पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गहरा शोक व्यक्त किया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी श्रद्धांजलि देते हुए लिखा कि डॉ. बशीर बद्र ने अपनी रचनाओं के माध्यम से जीवन को संवेदनशीलता, अपनत्व और मानवता के साथ जीने का संदेश दिया. उनकी आसान शायरी ने लोगों के जीवन को सरल बनाने का काम किया. मुख्यमंत्री ने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति और उनके प्रशंसकों व परिवार को यह दुख सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की है.


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