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4 जून 2026:
खबर प्रधान डेस्क:
मध्य प्रदेश/ भोपाल/

भोपाल. कोलार जल आपूर्ति
परियोजना की 30 साल पुरानी ग्रेविटी मेन पाइपलाइन  सनखेड़ा के पास फूट गई ‌ । जिसकी वजह से शहर के बड़े हिस्से में जल आपूर्ति बाधित हो रही है और इसे लगातार तीसरे दिन भी बहाल नहीं किया जा सका । कोलार ग्रेविटी पाइपलाइन में बड़ा लीकेज होने के कारण बुधवार को लगातार तीसरे दिन भी भोपाल के 2.2 लाख से अधिक निवासियों को भीषण जलसंकट का सामना करना पड़ा। और करीब शहर की 5 लाख की आबादी इसके चपेट में है।
इस बीच नियमित जलापूर्ति ठप्प होने से लोगों को टैंकर और अपनी वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
जो टैंकर 700 रुपए में मिलता था, उसकी कीमत मंगलवार को 1000  रुपए और बुधवार को 1500 से 2000 रुपए तक पहुंच गई है। जब पानी नहीं आया तो मजबूरी में लोगों को पानी खरीदना पड़ा। हालांकि नगर निगम ने प्रभावित जनता को राहत देने के लिए 70 टैंकर तैनात कर 490 ट्रिप लगाने का दावा किया है, लेकिन इनमें से 50 प्रतिशत टैंकरों की सप्लाई बुधवार को जोन-8 के चार इमली और तुलसी नगर जैसे रसूखदार और वीआइपी इलाकों में की गई। निगम के जल कार्य विभाग के अनुसार, अकेले जोन-8 के क्षेत्रों (चार इमली और तुलसी नगर) में लगभग 200 से 250 टैंकर ट्रिप लगाए गए, जो वरिष्ठ नौकरशाहों, राजनेताओं और अन्य हाई प्रोफाइल निवासियों के घर हैं।

वीआईपी इलाकों में अधिक टैंकर भेजे जाने पर उठे सवाल:
कोलार ग्रेविटी पाइपलाइन  के माध्यम से नियमित जल आपूर्ति की बहाली कल भी हो सकेगी । इसकी अनिश्चितता बनी हुई है। सोमवार को साकेत नगर साखेड़ी के पास पाइपलाइन फट गई थी। जिसे अधिकारियों को शहर के एक बड़े हिस्से में पानी की आपूर्ति निलंबित करने के लिए मजबूर होना पड़ा।  महापौर मालती राय ने बुधवार को मरम्मत स्थल का दौरा किया और अधिकारियों को काम में तेजी लाने के निर्देश भी दिए।
काम कर रहे इंजीनियरों का कहना है कि क्षतिग्रस्त पाइपलाइन की मरम्मत हो चुकी है और अभी ट्रस्ट ब्लॉक का निर्माण चल रहा है । जिसके  परीक्षण करने के बाद आपूर्ति बहाल कर दी जाएगी।
बीएमसी के अपर आयुक्त तन्मय वी. शर्मा का कहना है कि टैंकरों की आपूर्ति के लिए ऐसा कोई वीआईपी वर्गीकरण नहीं किया गया है।  और गुरुवार के लिए कोलार क्षेत्र के लिए पांच टैंकर तय किए हैं । किसी भी क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता इस कार्य के लिए नहीं दी जाती है और टैंकर केवल अत्यधिक प्रभावित क्षेत्रों में ही उपलब्ध कराए जाएंगे।


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