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9 June 2026

गुलाम जम्मू-कश्मीर में एक बार फिर हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। अपनी आर्थिक और राजनीतिक मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे आंदोलनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच भारी हिंसक झड़प हो गई है। इस हिंसा में चार पुलिसकर्मियों और सात नागरिकों समेत कुल 11 लोगों की जान चली गई है, जबकि 70 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। घटना के बाद से पूरे इलाके में गहरा तनाव है, जिसके चलते प्रशासन ने मोबाइल और इंटरनेट सेवाओं को पूरी तरह बंद कर दिया है। इसके साथ ही सिविल सोसाइटी समूहों के प्रतिबंधित संगठनों पर भी नजर रखी जा रही है।

कैसे शुरू हुआ यह पूरा विवाद?
इस पूरे विवाद की शुरुआत शुक्रवार को हुई, जब एक स्थानीय व्यापारी की पुलिसकर्मियों के साथ किसी बात को लेकर बहस हो गई। यह बहस इतनी बढ़ गई कि व्यापारी पर गोली चला दी गई। इसके बाद घायल व्यापारी का शव रावलकोट के कंबाइंड मिलिट्री हॉस्पिटल लाया गया, जिससे वहां मौजूद जेएएसी (Joint Awami Action Committee) के समर्थक और स्थानीय लोग बड़ी संख्या में इकट्ठा हो गए। देखते ही देखते प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच सीधा टकराव शुरू हो गया।
मामले को शांत करने के लिए और इस आंदोलन को कुचलने के लिए पाकिस्तानी रेंजर्स, पंजाब पुलिस और यहां तक कि सेना की टुकड़ियों को भी तैनात कर दिया गया है।

क्या हैं प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें?
जेएएसी (JAAC) ने इस आंदोलन के जरिए कुछ प्रमुख मांगें सरकार के सामने रखी हैं:

  1. शरणार्थियों के लिए आरक्षित सीटें खत्म करने की मांग: संगठन की मुख्य मांग है कि साल 2027 में होने वाले क्षेत्रीय विधानसभा चुनावों में कुल 45 सीटों में से जो 12 सीटें शरणार्थियों के लिए आरक्षित की गई हैं, उस व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त किया जाए। संगठन का आरोप है कि इन आरक्षित सीटों पर ऐसे उम्मीदवार चुनाव लड़ते हैं जो इस क्षेत्र में नहीं रहते, बल्कि पाकिस्तान के दूसरे हिस्सों में रहते हैं।
  2. प्रतिबंध का विरोध: शुक्रवार को क्षेत्रीय सरकार ने आतंकवाद-रोधी कानून के तहत जेएएसी को एक प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया था, जिसका लोग कड़ा विरोध कर रहे हैं।
    हालात को बिगड़ता देख प्रशासन ने पर्यटकों को भी सुरक्षा के लिहाज से जल्द से जल्द यह क्षेत्र छोड़ने की सलाह दी है।
    तनाव के बीच दावों और आरोपों का दौर
    पुलिस प्रमुख लियाकत मलिक के अनुसार, इस पूरी घटना में अब तक 23 सुरक्षाकर्मी और 50 प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं, जबकि 100 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। दूसरी तरफ, वहां के एक स्थानीय नेता वहीद खान का कहना है कि कुछ असामाजिक तत्वों की तरफ से की गई फायरिंग में चार पुलिसकर्मियों और एक राहगीर की मौत हुई, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई की और छह प्रदर्शनकारी मारे गए।

पाकिस्तान के सामने खड़ी हुईं कई चुनौतियां
विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय पाकिस्तान के सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व पर चौतरफा दबाव बढ़ रहा है। एक तरफ जहां पश्चिमी सीमा पर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) जैसी ताकतों की गतिविधियां बढ़ रही हैं, वहीं दूसरी तरफ इस अशांत क्षेत्र में बढ़ता असंतोष देश के लिए एक नई और बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि उनके क्षेत्र के संसाधनों का जमकर दोहन किया जा रहा है और यहाँ के संसाधनों का इस्तेमाल खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में किया जा रहा है, जिससे इलाके में आर्थिक और सामाजिक असंतोष लगातार गहराता जा रहा है।


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