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10 June 2026

मध्य प्रदेश सरकार अब बड़े महानगरों की तर्ज पर राज्य के छोटे और उभरते शहरों में भी यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन जैसे बड़े शहरों में ट्रैफिक का दबाव कम करने के लिए प्रमुख मार्गों पर एलिवेटेड कॉरिडोर और रिंग रोड का निर्माण पहले से ही किया जा रहा है। लेकिन अब विकास की इस कड़ी में राज्य के छोटे शहरों को भी शामिल किया गया है, जहां तेजी से वाहनों की संख्या और ट्रैफिक जाम की समस्या बढ़ रही है।

इन छोटे शहरों में बनेंगी नई रिंग रोड
सरकार की नई योजना के तहत अब रतलाम, देवास, सागर, सतना, रीवा और कटनी जैसे छोटे लेकिन व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण शहरों में रिंग रोड बनाई जाएंगी। इस प्रोजेक्ट को अमलीजामा पहनाने के लिए स्थानीय स्तर पर नगर निगम, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीएंडसीपी) और स्थानीय निकायों के साथ मिलकर एक साझा और मजबूत योजना तैयार की जाएगी। इसके साथ ही एक अन्य विकल्प पर भी विचार किया जा रहा है, जिसके तहत इन शहरों में पहले से बने हुए बाईपास को ही अपग्रेड करके रिंग रोड में बदल दिया जाए। इस पहल से न केवल शहरों के अंदर लगने वाले भारी ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर उद्योगों और व्यापार को भी एक नई रफ्तार मिलेगी।

एमपी के 5 बड़े शहरों में रिंग रोड प्रोजेक्ट्स की वर्तमान स्थिति:
इधर, राज्य के पांच बड़े शहरों के लिए पहले से मंजूर रिंग रोड के काम में भी तेजी लाई जा रही है। जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन में चल रहे रिंग रोड निर्माण कार्य को अगले डेढ़ साल (18 महीने) में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं भोपाल के लिए 35.6 किलोमीटर लंबे पश्चिमी बाईपास का काम आगामी ढाई साल में पूरा करने की तैयारी है। इंदौर के प्रोजेक्ट के लिए वर्तमान में डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) तैयार की जा रही है।
बड़े शहरों की वर्तमान स्थिति और उनके आंकड़े इस प्रकार हैं:

भोपाल (पश्चिमी बाईपास): इसकी कुल लंबाई 35.6 किलोमीटर है और इस पर 4884.53 करोड़ रुपये की लागत आ रही है। इसका वित्त पोषण राज्य बजट और निजी निवेश के माध्यम से किया जा रहा है। वर्तमान में यहां सप्लीमेंट्री की कार्रवाई चल रही है और 80 प्रतिशत भूमि अधिग्रहण का काम पूरा हो चुका है। इसे पूरा करने की समय सीमा दिसंबर 2028 तय की गई है।

इंदौर: एनएचएआई द्वारा बनाए जा रहे इस रिंग रोड की कुल लंबाई 139 किलोमीटर है और इसकी अनुमानित लागत 5900 करोड़ रुपये है, जिसका खर्च भारत सरकार उठा रही है। इसके पश्चिमी भाग का निर्माण कार्य जारी है, जबकि पूर्वी भाग के लिए डीपीआर तैयार हो रही है। इसकी समय सीमा दिसंबर 2029 रखी गई है।

जबलपुर: इसकी कुल लंबाई 118 किलोमीटर है और इस पर 3500 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। भारत सरकार द्वारा पोषित यह प्रोजेक्ट वर्तमान में निर्माणाधीन है और इसकी समय सीमा दिसंबर 2027 है।

उज्जैन: कुल 43 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट की लागत 625 करोड़ रुपये है, जिसे भारत सरकार, राज्य बजट और निजी निवेश से तैयार किया जा रहा है। इसमें से 32 किलोमीटर का हिस्सा एनएचएआई और 11 किलोमीटर का हिस्सा एमपीआरडीसी बना रहा है। यह उज्जैन-जावरा मार्ग में शामिल है और इसकी समय सीमा दिसंबर 2027 है।

ग्वालियर (पश्चिमी बाईपास): एनएचएआई द्वारा बनाई जा रही इस सड़क की लंबाई 29 किलोमीटर है और इसकी लागत 675 करोड़ रुपये है। भारत सरकार के इस प्रोजेक्ट के लिए ठेकेदार की नियुक्ति हो चुकी है, लेकिन अभी पर्यावरण और वन विभाग की स्वीकृतियां मिलना बाकी हैं। इसे पूरा करने की समय सीमा भी दिसंबर 2027 निर्धारित की गई है।


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