15 June 2026/ मध्य प्रदेश/ उज्जैन/
धार्मिक नगरी उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान महाकाल के मंदिर में रविवार को एक विशेष परंपरा निभाई गई। ज्येष्ठ अधिकमास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी के पावन अवसर पर भगवान महाकाल को पूरे विधि-विधान से छप्पन पकवानों का महाभोग लगाया गया।
भोर में हुआ विशेष अभिषेक और श्रृंगार
इस खास मौके पर मंदिर में सुबह से ही भक्तों और पुजारियों का तांता लगा रहा। तड़के सुबह चार बजे भस्म आरती के समय पुजारियों ने अवंतिकानाथ (भगवान महाकाल) का गंगाजल, पंचामृत, केसर और भांग से दिव्य अभिषेक किया। इसके बाद उनका भव्य श्रृंगार किया गया और फिर छप्पन पकवानों का महाभोग लगाकर भगवान की महाआरती की गई।
क्या है महाभोग की परंपरा?
मंदिर के पुजारी ओम गुरु ने इस परंपरा के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि महाकाल मंदिर की पूजन परंपरा के अनुसार, जब भी अधिकमास समाप्त होने वाला होता है, तो ठीक उसके एक दिन पहले यानी चतुर्दशी तिथि को भगवान को यह महाभोग लगाने का नियम है। इसी परंपरा का पालन करते हुए रविवार को अभिषेक, पूजन, श्रृंगार और महाभोग के बाद आरती का पूरा क्रम संपन्न किया गया।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और चौरासी महादेव यात्रा का संयोग
रविवार को छुट्टी का दिन होने और अधिकमास का समापन समय पास होने की वजह से महाकाल मंदिर में हजारों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुँचे। इसके पीछे एक और बड़ी वजह यह भी है कि इस समय उज्जैन में चौरासी महादेव की यात्रा चल रही है, जिसमें हजारों भक्त शामिल हो रहे हैं। महाकाल मंदिर परिसर के भीतर भी चौरासी महादेव में से चार महादेव के मंदिर स्थित हैं। यही कारण है कि भक्त भगवान महाकाल के दर्शन के साथ-साथ इन चारों महादेव मंदिरों के दर्शन करने भी भारी संख्या में पहुँच रहे हैं। सोमवार को सोमवती अमावस्या का महापर्व होने के कारण भी मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ जुटने की उम्मीद है।
साल 2029 में आएगा अगला अधिकमास, जानिए पंचांग की गणना
सोमवार को सोमवती अमावस्या महापर्व के विशेष संयोग के साथ ही इस ज्येष्ठ अधिकमास का समापन हो जाएगा। इसके बाद अब अगला अधिकमास साल 2029 में आएगा, जिसे चैत्र अधिकमास कहा जाएगा।
चैत्र मास में आने की वजह से भक्तों को उस समय आने वाले विशेष पर्व-त्योहारों, खास तौर पर चैत्र नवरात्रि के लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा। धर्म, ध्यान और अध्यात्म के नजरिए से साल 2029 का यह चैत्र अधिकमास बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है, क्योंकि यह सिंहस्थ महाकुंभ के ठीक अगले ही साल आने वाला एक विशेष महापर्व होगा।


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