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22 जून 2026

भारतीय नौसेना ने हिंद महासागर और गहरे समंदर में अपनी सुरक्षा और रणनीतिक पकड़ को पहले से कहीं ज्यादा मजबूत कर लिया है। कोलकाता के श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह पर आयोजित एक विशेष राजकीय समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन नए स्वदेशी युद्धपोतों— ‘दुनागिरी’, ‘अग्रेय’ और ‘संशोधक’ को नौसेना के बेड़े में शामिल (कमिशन) किया। यह भारतीय नौसेना के इतिहास में एक बड़ी और ऐतिहासिक छलांग है।

पहले भी हो चुका है ऐसा कमाल
यह पहली बार नहीं है जब नौसेना के बेड़े में एक साथ इतने युद्धपोतों को शामिल किया गया है। इससे पहले 15 जनवरी 2025 को मुंबई में भी आईएनएस नीलगिरि, आईएनएस सूरत और पनडुब्बी वागशीर को एक साथ नौसेना में शामिल किया गया था।

पूरी तरह से मेड इन इंडिया हैं ये जहाज
इन तीनों जहाजों की सबसे खास बात यह है कि इन्हें भारत में ही तैयार किया गया है। इनका डिजाइन भारतीय नौसेना के ‘वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो’ ने तैयार किया है। वहीं, इनका निर्माण कोलकाता की ही सरकारी क्षेत्र की रक्षा कंपनी ‘गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड’ (GRSE) ने किया है।

आधुनिक हथियारों से लैस हैं दुनागिरी और संशोधक
नौसेना के मुताबिक, ‘दुनागिरी’ युद्धपोत बेहद आधुनिक हथियारों और सेंसर प्रणालियों से लैस है। इसमें सतह से सतह पर मार करने वाली खतरनाक ब्रह्मोस मिसाइलें और मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें लगाई गई हैं। इसे लंबे समुद्री सफर और लगातार मिशन पर तैनात रहने के लिए खास तौर पर बनाया गया है। दूसरी तरफ, ‘संशोधक’ जहाज को गहरे समुद्री क्षेत्रों में हाइड्रोग्राफिक सर्वे (समुद्री नक्शे और डेटा जुटाने) के लिए डिजाइन किया गया है। यह जहाज आधुनिक सोनार सिस्टम से लैस है, जो पानी के नीचे मौजूद किसी भी तरह के खतरे का पता लगाने और उसे बेअसर करने में पूरी तरह सक्षम है।

पीएम मोदी ने कहा- अब भारत केवल खरीदार नहीं, बेचने वाला देश है
इस ऐतिहासिक समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की बढ़ती रक्षा उत्पादन क्षमता पर गर्व जताया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि आज का भारत केवल एक खरीदार रक्षा देश नहीं रह गया है, बल्कि वह कई देशों को आधुनिक हथियार बनाकर बेच भी रहा है। वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए यह साफ है कि जिस देश की समुद्री ताकत मजबूत होगी, उसका आर्थिक और रणनीतिक प्रभाव भी उतना ही मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि शांति की रक्षा के लिए

सैन्य सामर्थ्य और
आत्मनिर्भरता दोनों ही बहुत जरूरी हैं।
जहाज निर्माण से मिलेगा लाखों युवाओं को रोजगार
प्रधानमंत्री मोदी ने ‘शिपबिल्डिंग’ यानी जहाज निर्माण क्षेत्र को विकसित भारत के लिए एक ‘रोजगार इंजन’ के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि एक आधुनिक जहाज के निर्माण में हजारों टन स्टील, इलेक्ट्रॉनिक्स और तरह-तरह के कलपुर्जे लगते हैं। इसकी वजह से देश की छोटी-बड़ी कंपनियों और युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार मिलता है। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले सालों में यह क्षेत्र भारत में लाखों नए रोजगार तैयार करेगा।


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