6 July 2026:
आषाढ़ का महीना शुरू हो चुका है। आषाढ़ का महीना केवल एक मास ही नहीं बल्कि ऋतु परिवर्तन का सबसे महत्वपूर्ण संधिकाल होता है। तेज गर्मी के बाद अचानक वर्षा ऋतु का आगमन होता है। जिससे हमारे शरीर की पाचन शक्ति धीमी पड़ जाती है। हवा में बैक्टीरिया और वायरस सबसे ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं।
आईए जानते हैं आषाढ़ मास का क्या महत्व है ।
इस महीने कौन सी हरी सब्जियां फल खाने चाहिए और कौन से नहीं। इस मास में अपने पाचन तंत्र को मजबूत रखने के लिए क्या खाना सर्वश्रेष्ठ है।
सबसे पहले जानते हैं कि आषाढ़ मास का पौराणिक और वैदिक महत्व क्या है ज्योतिष के अनुसार आसान वह महीना है । जब सूर्य देव मिथुन राशि से निकलकर कर्क राशि में प्रवेश करते हैं जिसे कर्क संक्रांति कहते हैं और यही से सूर्य दक्षिणायन होते हैं।
यानी आषाढ़ मास का सीधा संबंध जगत के पालनहार भगवान विष्णु से है । इस महीने के अंत में देवशयनी एकादशी आती है । जब भगवान विष्णु के चार महीने के लिए क्षीरसागर में योग निद्रा में चले जाते हैं जिसे हम चातुर्मास कहते हैं।
यह महीना गुरु की उपासना के लिए सर्वोत्तम काल होता है । इस महीने में गुरु पूर्णिमा और व्यास जयंती का महापर्व मनाया जाता है। इस महीने को कामनाओं की पूर्ति साधना का महीना भी माना गया है । भगवान शिव ,माता दुर्गा और भगवान विष्णु की संयुक्त कृपा पाने के लिए आषाढ मास से बढ़कर कोई महीना नहीं है। लेकिन आध्यात्मिक उन्नति तभी संभव है । जब शरीर स्वस्थ हो इसलिए ऋषियों ने इस महीने के लिए विशेष आहार संहिता तैयार की है।
आप जानते हैं उस विज्ञान को जिसे हमारे पूर्वजों में हजारों साल पहले जान लिया था।
आषाढ़ का महीना ग्रीष्म ऋतु और वर्षा ऋतु का संध्याकाल होता है इस मास में आसमान में काले बादल जाने लगते हैं ,धूप कम होती है, वातावरण में नमी या ह्यूमिडिटी अचानक से बढ़ जाती है।
आयुर्वेद के अनुसार जैसे ही प्रकृति में नमी बढ़ती है ,मानव शरीर के भीतर की पाचन की अग्नि अत्यंत कमजोर हो जाती है । इस संधि काल में हमारे शरीर में वात यानि वायु दोष बढ़ने लगता है और पित्त संचित होने लगता है । पाचन तंत्र कमजोर होता है ,हवा में बैक्टीरिया वायरस फंगस सबसे ज्यादा सक्रिय होते हैं । यही कारण है कि आषाढ के महीने में पेट दर्द, डायरिया ,फूड प्वाइजनिंग, त्वचा के रोग, इन्फेक्शन और जोड़ों का दर्द सबसे ज्यादा परेशान करते है । हमारी सेहत पर आने वाले इस भारी संकट को टालने के लिए कुछ चीजों को पूरी तरह खाना वर्जित माना गया है।
आईए जानते हैं क्या खाना वर्जित माना गया है:
आषाढ़ के महीने में सबसे पहले चीज है -हरे पत्तेदार सब्जियां- जैसे पालक, मेथी, बथुआ ,चौलाई ये हरी सब्जियां सेहत के लिए तो वरदान होती है, लेकिन आषाढ़ के महीने में बारिश शुरू होती ही जमीन से कीड़े मकोड़े बाहर निकल आते हैं और हरी पत्तेदार सब्जियों के पत्तों के पीछे अपने अंडे और बैक्टीरिया छोड़ देते हैं। जिन्हें अच्छी तरह धोने के बाद भी यह सूक्ष्म चिता जीवाणु और जीव साफ नहीं होते और पेट में जाकर भयंकर अल्सर ,इन्फेक्शन, डायरिया, दस्त जैसे पेट जनित रोगों को पैदा करते हैं।
दूसरी वर्जित चीज है खट्टी चीजें जैसे दही ,मट्ठा, नींबू और इमली की अधिकता वाली चीज जो स्वाद में खट्टी होती है।
बासी भोजन से बचें:
इस महीने में रात का बच्चा हुआ भोजन भी नहीं खाना चाहिए इससे भी बीमारियां जल्दी घेर लेती हैं।
नमी के कारण बासी भोजन में कुछ ही घंटे में फंगस लग जाती है । भोजन बहुत जल्दी बैक्टीरिया का शिकार हो जाता है इसलिए दिन का या रात का बचा हुआ भोजन नहीं खाना चाहिए। इससे बहुत जल्दी बीमार हो सकते हैं।
मांस मछली तामसिक भोजन से बचें:
तीसरी वर्जित चीज है -मांस, मुर्गी- मुर्गा और तामसिक भोजन ,आषाढ़ में जल के स्रोत दूषित हो जाते हैं, जिससे मछलियां और अन्य जीव बीमार होते हैं। साथ ही यह समय जीवों का प्रजनन काल भी होता है। ऐसे समय में तामसिक भोजन करने से पेट की जठराग्नि पूरी तरह नष्ट हो जाती है । इस मौसम में तामसिक भोजन करने से लीवर की बीमारियां घेर लेती हैं।
किन सब्जियों से करें परहेज:
सब्जियों और मसाले में बैगन और मूली का सेवन पूरी तरह त्याग देना चाहिए । इस मौसम में बैगन में कीड़े लगने की संभावना सबसे ज्यादा होती है और यह शरीर में वास्तु दोष को बहुत ज्यादा बढ़ा देता है । जिससे जोड़ों का दर्द, गैस, अपच की समस्या हो जाती है। बैगन ,अरबी, मुली, जमीकंद जैसी भारी सब्जियों के अलावा इस माह में कटहल, उड़द की दाल जैसे चीज नहीं खाना चाहिए । ये चीजें पचने में अधिक समय लेती है, इसलिए इन खाद्य पदार्थों का सेवन आषाढ मास में नहीं करना चाहिए।
इस मौसम में बहुत अधिक तीखा खाना, लाल मिर्च ,लाल सूखी मिर्च, गरम मसाला और तली-भुनी चीजें का प्रयोग भी कम करना चाहिए । क्योंकि इस महीने में शरीर के अंदर पित्त जमा होता है । अत्यधिक गर्म मसाले खाने से छाती में जलन ,खट्टी डकारें और त्वचा पर मुंहासे या एलर्जी की समस्या हो सकती है। इस मौसम में तली-भुनी चीजें समोसा, कचौड़ी भी हमारे पाचन तंत्र को परेशान कर सकती हैं। जिससे लीवर की समस्या हो सकती है।
क्या खायें, जिससे बनी रहे सेहत:
अब जानते हैं हमें क्या खाना चाहिए– सबसे जरूरी चीज है, इस मौसम में गुनगुना या उबला हुआ पानी पीना चाहिए। गुनगुना पानी पीने से पानी संबंधित बीमारियां नहीं होती। पानी को उबालकर ठंडा करके पीने से पाचन तंत्र सुरक्षित रहता है।
इसके अलावा चना और जौ का सत्तू आषाढ़ महीने में खाना बेहद गुणकारी माना गया है । यह शरीर को ठंडक देता है जठराग्नि को ठंडक पहुंचाकर तुरंत ऊर्जा देता है । पेट को साफ करता है । छिलके वाली मूंग की दाल की खिचड़ी या सादा दलिया इस माह का सबसे उत्तम भोजन होता है । यह आसानी से पच जाता है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।
इसके अलावा इस महीने में बेल वाली सब्जियां खाना चाहिए, जो जमीन से ऊपर हवा में उगती हैं, जैसे लौकी, तोरई , टिंडा, परवल, यह सब्जियां पानी से भरपूर होती हैं । पचने में हल्की और सुपाच्य होती है। इनमें कीड़े लगने का खतरा नहीं होता। इसलिए इन सब्जियों को हमें खाने में अवश्य शामिल करना चाहिए।
आषाढ़ के महीने में जामुन खाना किसी वरदान से कम नहीं माना गया है । यह पेट के इंफेक्शन को मारता है, शुगर के मरीजों के लिए भी यह अद्भुत काम करता है, इसके अलावा अनार और पके हुए आम का सेवन भी किया जा सकता है।
मसाले में इस महीने अदरक, जीरा सौंफ और अजवाइन का अधिक प्रयोग करना चाहिए । भोजन बनाते समय चुटकी भर हींग और अजवाइन का तड़का लगाने से भोजन आसानी से पच जाता है । पेट में गैस और दर्द की समस्या नहीं होती।
अदरक का एक टुकड़ा सेंधा नमक के साथ खाने से मंद पड़ी हुई जठराग्नि सक्रिय हो जाती है।
आषाढ़ के महीने में व्रत रखना अधिक उपयोगी होता है ।आषाढ़ के महीने में दो एकादशी आती है । दोनों एकादशियां -योगिनी एकादशी और देवशयनी एकादशी शरीर को स्वस्थ और चुस्त-दुरुस्त रखने का सबसे बड़ा अवसर होता है।
दिन में सोने से बचें:
इस महीने में दिन में सोने से परहेज करना चाहिए। इस मौसम में दिन में सोने से शरीर में कफ और वात का संतुलन बिगड़ जाता है । शरीर में सुस्ती आती है वजन तेजी से बढ़ता है।
देर रात भोजन करने करने से बचें:
आषाढ़ के महीने में शाम 7:00 बजे के बाद भोजन न करें। यदि भूख लगे तो हल्दी वाला दूध या मूंग का सूप ले सकते हैं।
इस तरह से अपने शरीर को, अपने मन को और अच्छे स्वास्थ्य को बनाने के लिए इन महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखें।


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