1 अगस्त 2026:राष्ट्रीय खबर:
पेपर लीक करने वालों के लिए अब बचना आसान नहीं होगा। लाखों छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों पर अब कानून का सबसे सख्त शिकंजा कसने जा रहा है।
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद एंटी पेपर लीक बिल अब कानून बन चुका है। अब पूरे देश में पेपर लीक और परीक्षा में धांधली करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगा। इस नए कानून का मकसद सरकारी और सार्वजनिक परीक्षाओं को सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है। अब अगर कोई व्यक्ति पेपर लीक करता है या परीक्षा में गलत तरीके अपनाते हुए पकड़ा जाता है, तो उसे कम से कम 5 साल और अधिकतम 10 साल तक की जेल हो सकती है।
इसके साथ 50 लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है…अगर पेपर लीक किसी गैंग, माफिया या संगठित गिरोह की तरफ से किया जाता है, तो सजा और भी सख्त होगी।
ऐसे मामलों में 7 से 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इस कानून में सिर्फ पेपर लीक ही नहीं, बल्कि नई तकनीक से होने वाले अपराधों को भी शामिल किया गया है। अगर कोई एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से नकल करता है, परीक्षा का सिस्टम हैक करता है, ऑनलाइन पेपर भेजता है या साइबर फ्रॉड करता है, तो उस पर भी इसी कानून के तहत कार्रवाई होगी। दोनों सदनों से बिल पास होने के बाद सिर्फ राष्ट्रपति की मंजूरी बाकी थी। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलते ही यह बिल पब्लिक एग्जामिनेशन प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स अमेंडमेंट एक्ट, 2026 बन गया। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार ने अमेंडमेंट बिल दोनों सदनों में पेश किया था ।
बताया जा रहा है कि संसद से बिल पास होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात भी की थी…. इसके बाद राष्ट्रपति ने इस कानून को मंजूरी दे दी…सरकार का कहना है कि इस कानून का मकसद उन लोगों और संगठनों पर रोक लगाना है जो पैसे लेकर पेपर लीक करते हैं या परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं। इससे छात्रों का भरोसा मजबूत होगा और परीक्षाएं ज्यादा निष्पक्ष बनेंगी.।
यह कानून सिर्फ नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA की परीक्षाओं तक सीमित नहीं रहेगा……. यह UPSC, कर्मचारी चयन आयोग यानी SSC, बैंकिंग भर्ती परीक्षाओं और दूसरी सभी सार्वजनिक परीक्षाओं पर भी लागू होगा…गौरतलब है कि हाल के वर्षों में कई बड़ी परीक्षाओं में पेपर लीक के मामले सामने आए थे।
एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले कुछ सालों में देश में कई बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और परीक्षा में धांधली के मामले सामने आए। . सबसे बड़ा विवाद 2026 के NEET-UG पेपर लीक को लेकर हुआ, जिसके बाद परीक्षा रद्द करनी पड़ी और दोबारा कराई गई। लाखों छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किए और परीक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल उठे। सरकार का कहना है कि इन घटनाओं से छात्रों का भरोसा कमजोर हुआ और ईमानदारी से तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों का नुकसान हुआ। इसी वजह से सरकार ने पुराने कानून को और सख्त बनाने का फैसला किया। नए कानून का उद्देश्य पेपर लीक करने वाले गिरोहों पर कड़ी कार्रवाई करना, समयबद्ध जांच कराना और सार्वजनिक परीक्षाओं की reliability को मजबूत करना है। .इन्हीं घटनाओं के बाद सख्त कानून की मांग लगातार उठ रही थी….
अब सरकार का दावा है कि नए कानून के लागू होने के बाद पेपर लीक और परीक्षा में धांधली करने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी और छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के लिए बचना आसान नहीं रहेगा।


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