12 सितंबर 2026:
उत्तर प्रदेश/ सहारनपुर /
सहारनपुर मस्जिद के मलबे के नीचे एक गहरा 100 साल पुराना कुआं मिला है।
सहारनपुर के कलेक्ट्रेट ऑफिस में एक मस्जिद बनी हुई थी। कोर्ट के ऑर्डर के बाद मस्जिद को सुबह 4 से 6 बजे के बीच बुलडोजर कार्रवाई के तहत ढहा दिया गया। जिसमें कई सियासत भी हुई, सवाल भी उठे और विरोध भी हुआ।
किंतु यह मस्जिद वैध थी या अवैध। मस्जिद के अंदर एक कुआं भी था मस्जिद को बुलडोजर से ढहा दिया गया और मलबे के नीचे जो निकला उसने पूरी तस्वीर ही बदल दिया। मस्जिद को एक बार फिर मंदिर से जोड़कर देखा गया। क्योंकि कुआं को हिंदू धर्म से जोड़कर देखा जाता है। जहां मूर्ति स्थापित होती है। यह कुआं 20 फीट गहरा पत्थरों से ढका हुआ था प्रशासन ने पत्थर हटाया तो कुआं दिखाई दिया। इस कुएं को पुलिस ने लोहे की चादर से ढक दिया है। जिससे मलबा इसके अंदर ना जाए। प्रशासन यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि यह कुआं कितना पुराना है हिंदू पक्ष यहां मंदिर होने का दावा कर रहा है।
मुस्लिम पक्ष का दावा मस्जिद है 100 साल पुरानी:
मुस्लिम पक्ष का दावा है कि मस्जिद 100 साल पुरानी थी । 70 साल पुराने वक्फ के दस्तावेजों में इसका जिक्र है।
यह मस्जिद सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में बनी हुई थी। शनिवार को बुलडोजर एक्शन में इस ढहा दिया गया । यह बुलडोजर की कार्रवाई 16 घंटे तक चलती रही । इसके बाद रात भर मलबा हटाने का काम चला। यह मस्जिद करीब 3300 स्क्वायर फीट में बनी हुई थी जिसमें दो मंजिला मस्जिद में दो बड़े हाल सहित पांच कमरे थे।
पहली मंजिल पर हाल के साथ एक बड़ा कमरा था।
वर्ष 2025 फरवरी में बजरंग दल के एक नेता ने इसकी शिकायत की थी। और शिकायत में मस्जिद को अवैध बताया था। इसके बाद डीएम ने मजिस्ट्रेट को जांच के आदेश दिए ।16 जुलाई 2026 को कोर्ट ने भी मस्जिद को अवैध माना और बुलडोजर कार्रवाई के जरिए मस्जिद को ढहा दिया गया। 20 से 25 फीट गहरा एक कुआं नजर आ रहा है तकनीकी टीमें जांच कर रही है। जिससे सारी चीज स्पष्ट हो जाएगी।
जैसे-जैसे खुदाई की जा रही है, बीच में कुआं मिलना इस बात का सबूत है कि मस्जिद साजिश पूर्ण ढंग से शरारती तत्वों के द्वारा बनाई गई थी। जो बेहद ही निंदनीय और दंडनीय है।
इसमें सियासी संग्राम छिड़ा हुआ है सियासत हो रही है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद का कहना है कि देश के संविधान के लिए ,प्रदेश की न्यायिक प्रणाली के लिए यह बहुत ही दुखद है। मस्जिद की इमारत टूटने से उनका दिल टूट गया है।
इधर सुधांशु द्विवेदी का कहना है कि किसी भी ढांचे को उसकी धार्मिक पहचान के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए । सिर्फ इस आधार पर परखा जाना चाहिए कि वैध है या अवैध। कानून के मुताबिक कार्रवाई हो रही है तो इस पर सियासत क्यों हो रही है।


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