12 सितंबर 2026:
हरतालिका तीज भाद्र पद के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है।  इस दिन महिलाएं भगवान शिव और भगवान और माता पार्वती की पूजा करती हैं, निर्जला व्रत रखती  है। और सुखी दांपत्य जीवन, अखंड सौभाग्य की कामना  करती है। इस वर्ष हरितालिका तीज को लेकर सभी महिलाओं के मन में बहुत ही शंका है कि 13 सितंबर को मनाएं या 14 सितंबर को।
आईए जानते हैं सही तिथि और पूजा मुहूर्त:
हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 13 सितंबर को सुबह 7:08 से शुरू हो रही है और इसका समापन 14 सितंबर को 7:06 पर हो रहा है।
उदया तिथि के अनुसार हरतालिका तीज का व्रत 14 सितंबर को रखा जाएगा।
पूजा का शुभ मुहूर्त:
उदया तिथि के अनुसार 14 सितंबर को महिलाएं हरतालिका तीज का व्रत कर रही है 14 सितंबर को पूजा के लिए शुभ समय है सुबह 6:05 से 7:06 तक। इस मुहूर्त में भगवान शिव और माता की  पूजा की जाएगी।
ब्रह्म मुहूर्त की बात करें तो सुबह 4:32 से 5:19 तक पूजा का शुभ मुहूर्त है । अभिजीत मुहूर्त 11:52 से दोपहर 12:41 तक रहेगा।
यह शुभ मुहूर्त पूजा के लिए अति उत्तम है।
आईए जानते हैं पूजा विधि:
इस दिन महिलाएं सुबह स्नान करके स्वच्छ और नए वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लें।
इस दिन हरे रंग के वस्त्र पहनना बहुत ही शुभ माना जाता है।
पूजा के लिए बालू या मिट्टी से भगवान शिव माता पार्वती और गणेश जी की प्रतिमा बनाई जाती है और विधि विधान से इसकी पूजा की जाती है।
भगवान शिव को गंगाजल पंचामृत से स्नान कराएं और  बेलपत्र शमी पत्र धतूरा और मंदार के फूल अर्पित किए जाते हैं । माता पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित की जाती हैं । इसमें चूड़ी बिंदी मेहंदी सिंदूर महावर जैसी  सुहाग की सामग्री अर्पित की जाती है। और हरितालिका व्रत की कथा सुनी जाती है।
और पूजा के बाद यह सुहाग सामग्री किसी सुहागन महिला या किसी ब्राह्मणी को दी जाती है।
रात में जागरण किया जाता है, महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं और रात्रि की अलग-अलग प्रहर में शिव पार्वती की पूजा आरती और भजन किए जाते हैं। अगले दिन सुबह व्रत का पारण किया जाता है।

इसके बाद सुबह  पूजन कर भगवान शिव माता पार्वती और गणेश जी की जो प्रतिमा किसी नदी तालाब के किनारे विसर्जित किया जाता है।  यदि ऐसा संभव ना हो तो घर में ही पानी से भरे थाल,या टब  में विसर्जित कर मिट्टी को पौधों या गमले में डाल दिया जाता है।

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