भिलाई में सबसे बड़ी कार्रवाई, पूर्व मंत्री के करीबियों पर गिरा शिकंजा
संवाददाता
20 May 2025
अपडेटेड: 8:59 AM 0thGMT+0530
भिलाई में सबसे बड़ी कार्रवाई, पूर्व मंत्री के करीबियों पर गिरा शिकंजा
छत्तीसगढ़ में बीते कुछ महीनों से भ्रष्टाचार और आर्थिक अनियमितताओं के खिलाफ जांच एजेंसियों की कार्रवाई तेज़ होती जा रही है. ताजा मामला राज्य में हुए 2000 करोड़ रुपये के शराब घोटाले से जुड़ा है. इस मामले में मंगलवार सुबह राज्य के कई जिलों में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) और इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) की टीमों ने एक साथ बड़ी कार्रवाई की.
दुर्ग-भिलाई, महासमुंद, धमतरी, रायपुर समेत 20 से ज्यादा ठिकानों पर छापे मारे गए. सबसे व्यापक छापेमारी भिलाई में हुई, जहां 22 स्थानों पर एक साथ कार्रवाई की गई.
सूत्रों के अनुसार, यह छापेमारी पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा के करीबियों के ठिकानों पर केंद्रित रही. टीमों ने कागजातों की गहन जांच-पड़ताल की और वित्तीय लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड जब्त किए. ACB और EOW की चार गाड़ियों में सवार टीमें सुबह 5 बजे भिलाई पहुंचीं और ताबड़तोड़ दबिश देना शुरू कर दिया.
बड़े कारोबारियों के घर और प्रतिष्ठानों पर दबिश
शराब घोटाले की जांच के तहत जिन प्रमुख व्यक्तियों पर शिकंजा कसा गया है, उनमें कई नामी कारोबारी शामिल हैं.
भिलाई के आम्रपाली अपार्टमेंट में रहने वाले अशोक अग्रवाल, जिनकी फेब्रिकेशन फैक्ट्री है और जो पूर्व मंत्री कवासी लखमा के करीबी माने जाते हैं, उनके यहां जांच की गई. इसके अलावा एसके केजरीवाल, विनय अग्रवाल, संजय गोयल, विश्वास गुप्ता, बंसी अग्रवाल और आशीष गुप्ता के घरों और व्यवसायिक ठिकानों पर भी ACB और EOW की टीमें पहुंचीं.
जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई शराब कारोबार में बड़े पैमाने पर हुए भ्रष्टाचार, अवैध ठेके, वित्तीय लेनदेन और बेनामी संपत्तियों से जुड़ी है. इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी इस घोटाले में सक्रिय रह चुकी है.
ED ने पहले ही दायर किया था 3841 पन्नों का चालान
इस मामले में 13 मार्च को ED ने रायपुर की विशेष अदालत में 3841 पन्नों का चालान दाखिल किया था. इस चालान में पूर्व मंत्री कवासी लखमा के अलावा 21 अन्य लोगों के नाम भी शामिल हैं. इनमें कई अधिकारी, व्यापारी और ठेकेदार हैं जो शराब वितरण और रिटेल कारोबार से जुड़े रहे हैं.
इस घोटाले को लेकर राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा तेज है. इसे दिल्ली के कथित शराब घोटाले से जोड़कर देखा जा रहा है. सवाल यह भी उठ रहे हैं कि क्या इस घोटाले से छत्तीसगढ़ में कोई “नया केजरीवाल” सामने आएगा या यह मामला किसी अप्रत्याशित मोड़ पर जाकर खत्म होगा.