इंदौर/ दूषित पानी मामले पर याचिकाओं पर सुनवाई: हाई कोर्ट ने जताई नाराजगी
संवाददाता
6 January 2026
अपडेटेड: 4:54 PM 0thGMT+0530
इंदौर: इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी कांड पर हाई कोर्ट में आज सुनवाई:
दूषित पानी पीने से हुई मौतों के बाद अब पानी से फैली हुई बीमारी ने हालात बद से बद्तर कर दिए हैं। और बड़ी संख्या में लोग बीमार होकर अस्पतालों के चक्कर लगा रहे हैं।
इस मामले में आज इंदौर हाई कोर्ट में पांच याचिकाओं में सुनवाई हुई।
जहां हाईकोर्ट ने सरकार, नगर निगम और जिला प्रशासन के ढुलमुल रवैया पर तीखी टिप्पणी की और नाराजगी जताई।
हाई कोर्ट ने कहा कि सरकार का जवाब असंवेदनशील है । और इस गंभीर घटना से इंदौर जैसे स्वच्छत्तम शहर की छवि को देशभर में नुकसान पहुंचा है।
आज इंदौर हाई कोर्ट में पांच याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की।
हाई कोर्ट ने पूरे घटनाक्रम को बेहद गंभीर बताई और कहा कि इंदौर जैसे स्वच्छ शहर में इस तरह की घटना होना अपने आप में आश्चर्य जनक और चौंकाने वाला है।
हाई कोर्ट ने मृतकों की संख्या को लेकर नगर निगम और जिला प्रशासन की रिपोर्ट पर नाराजगी जताई और फटकार लगाते हुए कहा कि इस तरह की रिपोर्ट से मामले की गंभीरता कम नहीं होती।
हाई कोर्ट ने यह टिप्पणी की इस मामले में घटना की आपराधिक जिम्मेदारी तय करने का फैसला कोर्ट करेगा कि यह सिर्फ लापरवाही या अनदेखी है।
मुख्य सचिव को पेश करने का दिया निर्देश:
हाई कोर्ट ने मामले को काफी गंभीर बताई और 15 जनवरी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मुख्य सचिव को कोर्ट के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में शीर्ष स्तर पर जवाबदेही तय की जानी चाहिए । हाई कोर्ट ने सरकार को यह भी निर्देश दिया कि हर नागरिक को स्वच्छ पानी और उचित इलाज मिलने की जिम्मेदारी सरकार की है । यह लोगों की स्वास्थ्य से जुड़ी और जान से जुड़ा हुआ मामला है ,इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब सिस्टम की लापरवाही के संकेत और पूरे सिस्टम की जवाबदेही तय की जाएगी । इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर ठोस कार्रवाई की जाने के संकेत साफ नजर आ रहे हैं।
प्रशासन हुआ अलर्ट:
दूषित पानी से हुई मौत के बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम सक्रिय हो गई है। इस इलाके में टीम घर-घर पहुंच कर लोगों की जानकारी जुटा रही है। जिसमें परिवार की बीमारी ,लक्षण, पानी का उपयोग और स्वास्थ्य से जुड़े हुए सवाल पूछे जा रहे हैं।
सर्वे का मुख्य उद्देश्य:
इस सर्वे का मुख्य उद्देश्य है कि दूषित पानी से लोग किस स्तर तक प्रभावित हुए हैं। और संक्रमण का खतरा कितना है। इस आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। विशेषज्ञों की टीम पानी में बैक्टीरिया के मौजूद होने की जांच कर रही है।
पानी के सैंपल की जांच एम्स की विशेषज्ञ टीम कर रही है। जिससे संक्रमण का असली कारण पता चल सके। स्वास्थ्य विभाग की टीम लोगों को ओआरएस का घोल, जिंक की गोलियां और पानी साफ करने के लिए क्लोरीन वितरित कर रही है। लोगों को जागरूक करने हेतु स्वास्थ्य विभाग की टीम हर स्तर पर निगरानी कर रही है। घर-घर सर्वे और दवाइयां का वितरण चल रहा है। लोगों को पानी उबालकर इस्तेमाल करने की सलाह दी जा रही है किंतु लोग अभी भी दहशत में है।
लोगों में है डर का माहौल:
भागीरथपुरा क्षेत्र में डर का इतना माहौल है कि लोगों ने नल के पानी को हाथ लगाने से इनकार कर दिया है और लोग चाय तक के लिए बिसलेरी और सील पैक बोतलबंद पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं । छोटी दुकान वाले हो या बड़ी दुकान वाले, हर जगह बोतल बंद पानी का इस्तेमाल किया जा रहा है। नल के पानी का इस्तेमाल करने का जोखिम लेने को कोई तैयार नहीं है।
गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार के लिए पानी बना मुसीबत:
पानी के लिए गरीब और मध्यम वर्गी परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है। लेकिन फिलहाल उनके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं है। नगर निगम ने पानी के टैंकरों की व्यवस्था कराई है, किंतु लोगों को उसे पानी पर भी भरोसा नहीं है। अब बड़ा सवाल यह है कि भागीरथपुरा के लोग कब तक डर और असुरक्षा के साए में रहेंगे।