25 अप्रैल 2026

रायपुर:
छत्तीसगढ़ सहित देश के कई राज्यों में विदेशी फंडिंग के जरिए धर्मांतरण और चर्च निर्माण की एक बड़ी साजिश का पर्दाफाश हुआ है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में सामने आया है कि अमेरिका की एक मिशनरी संस्था ने भारत के गांवों में चर्च स्थापित करने के लिए करीब 95 करोड़ रुपये भेजे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस पैसे का लेन-देन सामान्य बैंक ट्रांसफर के बजाय विदेशी डेबिट कार्डों के जरिए किया गया।

अमेरिकी संस्था का ‘हर गांव में चर्च’ का लक्ष्य
जांच के मुताबिक, अमेरिका की मिशनरी संस्था ‘द तिमोथी इनीशिएटिव’ (TTI) भारत में बड़े पैमाने पर नेटवर्क चला रही है। इस संस्था का मुख्य लक्ष्य भारत के हर गांव में एक चर्च स्थापित करना है। ईडी को पता चला है कि इस संस्था के तार प्रदेश के उन क्षेत्रों से भी जुड़े हैं जो माओवादी हिंसा से प्रभावित रहे हैं।
विदेशी डेबिट कार्ड से निकाले गए करोड़ों रुपये
ईडी की जांच में धन के लेन-देन का एक अनोखा तरीका सामने आया है:
नवंबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच देश भर में लगभग 95 करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ।
अमेरिका के एक बैंक द्वारा जारी किए गए डेबिट कार्ड्स का उपयोग भारत के अलग-अलग राज्यों में पैसे निकालने के लिए किया गया।
बस्तर और धमतरी जैसे इलाकों में इन कार्ड्स के जरिए साढ़े छह करोड़ रुपये से ज्यादा की नकदी निकाली गई।

बेंगलुरु एयरपोर्ट से मुख्य संदिग्ध गिरफ्तार
इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए ईडी ने ‘मीकाह मार्क’ नाम के व्यक्ति को बेंगलुरु एयरपोर्ट से पकड़ा है। पकड़े जाने के समय उसके पास से 24 विदेशी डेबिट कार्ड बरामद हुए हैं। जांच में संकेत मिले हैं कि देश के कई अन्य लोग भी इस नेटवर्क से जुड़े हुए हैं। मीकाह मार्क के खिलाफ पहले ही लुक आउट नोटिस जारी किया गया था।

छह राज्यों में ईडी की छापेमारी
इस पूरे सिंडिकेट को तोड़ने के लिए ईडी ने 18 और 19 अप्रैल को देश के छह अलग-अलग राज्यों में ताबड़तोड़ छापेमारी की थी। जांच में पाया गया कि विदेशी डेबिट कार्डों को अवैध रूप से भारत लाया गया था ताकि बिना किसी रिकॉर्ड के बड़ी मात्रा में नकदी निकाली जा सके और उसे चर्च निर्माण और मिशनरी गतिविधियों में लगाया जा सके।
फिलहाल ईडी इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि इस पैसे का इस्तेमाल कहीं देश विरोधी गतिविधियों या जबरन धर्मांतरण के लिए तो नहीं किया जा रहा था।